
प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर : सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में लंबित ई-चालान के जुर्माने की वसूली को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए तरीके तलाशने का सुझाव दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि केवल चालान जारी करते रहना पर्याप्त नहीं है, असली चुनौती जुर्माने की वसूली है।
कोर्ट ने यहां तक सुझाव दिया कि लंबित ट्रैफिक जुर्माने को बिजली बिल में जोड़कर वसूली का रास्ता तलाशा जा सकता है। मध्यप्रदेश में 2021 से 30 जुलाई तक 262.38 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने सुझाव दिया कि बकाया चालान बिजली बिल में जोड़ने का तरीका निकालें। बिजली बिल नहीं चुकाया तो कनेक्शन कटेगा।
उन्होंने कहा कि बकाया चालान वाले वाहन को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने की व्यवस्था पर विचार हो। भुगतान तक आरसी नवीनीकरण, डुप्लीकेट आरसी और वाहन का मालिकाना हक ट्रांसफर रोका जा सकता है। फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र भी न दिए जाएं। ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण रोकने या मौजूदा लाइसेंस निलंबित करने पर भी विचार हो। मामला 2012 से चल रही एस. राजशेखरन सड़क सुरक्षा जनहित याचिका में ई-चालान व्यवस्था और वसूली से जुड़ा है।
इस सुझाव के बाद इंदौर में पिछले तीन महीने जून, जुलाई और अगस्त के ई-चालान का आंकड़ा देखा गया तो तस्वीर वसूली की बड़ी चुनौती दिखाती है। इस तीन महीने की अवधि में कुल 97,088 ई-चालान बनाए गए। इन पर कुल दो करोड़ 96 लाख 99 हजार 400 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इनमें से 88 हजार 354 चालान अब भी लंबित हैं और इनकी राशि दो करोड़ 70 लाख 43 हजार 600 रुपये है।
यानी तीन महीने में बने कुल चालानों में संख्या के लिहाज से करीब 91 प्रतिशत चालान ऐसे हैं, जिनका जुर्माना लंबित है। राशि के हिसाब से भी करीब 91 प्रतिशत राशि की वसूली बाकी है। इसके मुकाबले ई-चालान के माध्यम से अब तक 8,721 भुगतानों से 26 लाख 55 हजार 800 रुपये की राशि प्राप्त हुई है।
आंकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि चालान काटने और जुर्माना वसूलने के बीच बड़ा अंतर है। यानी डिजिटल माध्यम से यातायात नियम तोड़ने वालों की पहचान और चालान बनाने की व्यवस्था सक्रिय है, लेकिन उसके बाद जुर्माना जमा कराने की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मामले अटक रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में रखी गई जानकारी के अनुसार देशभर में करीब 45 हजार करोड़ रुपये के ट्रैफिक चालान जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 25 हजार करोड़ रुपये वसूल हुए हैं और लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की राशि अभी बाकी बताई गई।
पीठ ने लंबित चालानों वाले वाहनों की पहचान के लिए रैंडम चेकिंग जैसे उपायों पर भी विचार करने को कहा। इंदौर का आंकड़ा इसी राष्ट्रीय चुनौती का स्थानीय चित्र सामने रखता है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने चालान बने, बल्कि यह है कि लंबित 88,354 चालानों से 2.70 करोड़ रुपये की राशि कैसे वसूली जाएगी?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्यप्रदेश में लागू होती है तो यातायात पुलिस तत्काल इंदौर में लागू करेगी। इसके लागू होने से पेंडिंग चालानों के आंकड़ों में गिरावट आएगी और वाहन चालक नियमों का पालन भी सख्ती से करेंगे। इंदौर के चौराहों पर लगे कैमरों के माध्यम से लगातार चालान बनाए जा रहे हैं। विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाएं जा रहा है। -संतोष कुमार कौल, एडिशनल डीसीपी, ट्रैफिक
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