भागीरथपुरा में टूटे नर्मदा लाइन पर बने एक दर्जन पुराने चैंबर, सुधार की कवायद तेज
Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में नगर निगम ने सुधार कार्य तेज कर दिए हैं। पिछले तीन दिनों से निगम की टीम नर्मदा लाइन के ऊपर बने ड्रेनेज चैं ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 03 Jan 2026 05:24:42 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Jan 2026 05:24:42 PM (IST)
भागीरथपुरा में टूटे नर्मदा लाइन पर बने एक दर्जन पुराने चैंबरHighLights
- भागीरथपुरा में नर्मदा लाइन पर बने एक दर्जन ड्रेनेज चैंबर तोड़े
- ड्रेनेज लाइन को व्यवस्थित ढंग से नए चैंबरों से जोड़ा गया है
- निगम को चौंकाने वाली इंजीनियरिंग खामियां मिली थीं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में नगर निगम ने सुधार कार्य तेज कर दिए हैं। पिछले तीन दिनों से निगम की टीम नर्मदा लाइन के ऊपर बने ड्रेनेज चैंबरों को तोड़ने में जुटी हुई हैं। अब तक एक दर्जन से अधिक पुराने चैंबर तोड़े जा चुके हैं और उनकी जगह नए चैंबर बनाए गए हैं। साथ ही ड्रेनेज लाइन को व्यवस्थित ढंग से नए चैंबरों से जोड़ा गया है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार इलाके में अभी भी कई ऐसे चैंबर मौजूद हैं, जो नर्मदा लाइन के ऊपर बने हुए हैं और उनके पास से ड्रेनेज लाइन गुजर रही है। ऐसे चैंबरों को भी अगले चार-पांच दिनों में तोड़कर नए सिरे से बनाया जाएगा। इस बीच भागीरथपुरा की पानी की टंकी के पास बने शौचालय को भी तोड़ा गया है और नर्मदा लाइन में हुए लीकेज को ठीक किया गया। बावजूद शुक्रवार को भी कुछ घरों में दूषित पानी पहुंचने की शिकायतें सामने आईं।
नियम को मिली चौंकाने वाली खामियां
निगम अधिकारियों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह क्षेत्र की गलियों में नर्मदा और ड्रेनेज लाइनों का अव्यवस्थित ढंग से डाला जाना है। जांच के दौरान निगम को चौंकाने वाली इंजीनियरिंग खामियां मिली थीं। कई गलियों में नर्मदा जल सप्लाई लाइन के ठीक ऊपर ड्रेनेज लाइन बिछी हुई पाई गई। मंगलवार से इन गलत चैंबरों को तोड़ने का काम लगातार जारी है और अब तक एक दर्जन नए चैंबर बनाए जा चुके हैं।
पुराने चैंबर तोड़कर नए बनाए गए
गली नंबर-2 में गलत चैंबर पर तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव की आपत्ति के बाद नया चैंबर बनाया गया। इसी तरह गली नंबर चार और छह में भी पुराने चैंबर तोड़कर नए बनाए गए हैं। स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया है कि नर्मदा और ड्रेनेज लाइन का काम पार्षद कमल बाघेला ने अपने करीबियों से करवाया, जो इस काम के विशेषज्ञ नहीं थे। पार्षद ने स्वीकार किया है कि करीबियों से केवल 10 प्रतिशत काम करवाया गया था।