Acharya Vidyasagar Maharaj: ऐसी पसंद आई इंदौर के समाज की भक्ति कि 316 दिन का दिया सान्निध्य
Acharya Vidyasagar Maharaj: पांच साल पहले आए आचार्य विद्यासागर महाराज के सान्निध्य में हुए थे 11 मंदिरों के पंचकल्याणक।
By Sameer Deshpande
Edited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Mon, 19 Feb 2024 08:30:00 AM (IST)
Updated Date: Mon, 19 Feb 2024 08:30:00 AM (IST)
इंदौर के विजयनगर में वर्ष 2019 में संबोधित करते आचार्य विद्यासागर महाराज। -नईदुनिया आर्काइव रामकृष्ण मुले, इंदौर Acharya Vidyasagar Maharaj। दिगंबर जैन समाज के सबसे बड़े आचार्य विद्यासागर महाराज का शनिवार रात 2.35 बजे देवलोक गमन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए अनुयायी डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) पहुंचे। 57 वर्ष से अधिक साधु जीवन में इंदौर ही एकमात्र शहर है, जहां वे 10 माह से अधिक (करीब 316 दिन) रुके। इस दौरान उनके सान्निध्य में 11 मंदिरों के पंचकल्याणक हुए। आचार्यश्री ने कहा था कि इंदौर के समाज की गुरु भक्ति विशेष है।
सन 1999 के बाद उनका आगमन पांच जनवरी 2019 में
अहिल्या नगरी में हुआ था। 25 मार्च को कोरोना के चलते लगे लाकडाउन के बाद रेवती रेंज स्थित प्रतिभा स्थली पर वे विराजमान हुए। जब लाकडाउन से राहत मिली, तब तक चातुर्मास स्थापना का समय हो गया। 12 जुलाई को आचार्यश्री के
चातुर्मास कलश स्थापना हुई। भगवान महावीर के निर्वाण दिवस 15 नवंबर को चातुर्मास निष्ठापन के बाद उनका
इंदौर से विहार शुरू हुआ।
आचार्यश्री का इंदौर में चातुर्मास यादगार रहा। इस दौरान वे गोयल नगर, विजय नगर, तिलक नगर सहित विभिन्न कालोनियों में पहुंचे। नेमावर, विदिशा, जबलपुर, देवरीकलां, बिनाबारा सहित विभिन्न स्थानों पर उन्होंने चातुर्मास किया। किसी भी स्थान पर साढ़े चार-पांच माह से ज्यादा समय वे नहीं रुके। इंदौर के अलावा इतना वक्त वे कहीं भी नहीं रुके।
- कमल अग्रवाल, दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट
आंख उठाकर देखने भर से उनके भक्तों का जीवन निहाल हो जाता है। ऐसे महागुरु का वियोग हो जाना किसी भी श्रावक के जीवन की बहुत बड़ी दुखद घटना है। संपूर्ण जैन समाज ने आज एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है जो समाज को एक सूत्र में बांधे रखता था। जिनकी एक आवाज से, एक इशारे से जैन समाज एक सूत्र में बंध जाता था।
- अशोक बड़जात्या, राष्ट्रीय अध्यक्ष, दिगंबर जैन महासमिति