इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Achievement Indore News। होलकर साइंस कालेज से माइक्रोबायोलाजी में बीएससी कर रही निरंजनी शर्मा के प्रोजेक्ट को इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इंर्फोरमेशन टेक्नोलाजी (आइआइआइटी) इलाहाबाद ने फंडिंग के लिए चुना है।

भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी द्वारा निरंजनी के इनोवेटिव आइडिया को मूर्त रूप देने के लिए 2. 5 लाख रुपये तक की फंडिंग भी दी जाएगी। देशभर के प्रतिभागियों में से प्रोजेक्ट चुना गया है। निरंजनी ने बताया कि सैप्टिक टैंक से निकलने वाली गैस को सीएनजी में बदलकर ऊर्जा की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना शहरीय तरल अपशिष्ट से 12 हजार मैट्रिक टन गैस का उत्पादन संभव है।

निरंजनी ने बताया कि आइआइटी इंदौर और जेआइसी जबलपुर के इंक्यूबेशन केंद्र से भी आइडिया को उत्पाद में बदलने के लिए मदद मिल रही है। निरंजनी के मेंटर अरविंद चौरे का कहना है कि मानव मल और गोबर में ऊर्जा की मात्रा लगभग बराबर होती है। सैप्टिक टैंक से मुख्यतथ मिथेन और कार्बन डाई आक्साइड गैस निकलती है। इससे प्रदूषण फैलता है और ओजोन परत को भी नुकसान होता है। रिवर्स ग्रिड सिस्टम द्वारा गैस को एकत्र कर सीएनजी में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे काफी गैस मिल सकती है और शहर की वायु भी साफ होगी। इससे नदी-नाले भी साफ रहेंगे। इस प्रोजेक्ट को शहर में लागू करने के लिए नगर निगम इंदौर से भी बात की जा रही है।

Posted By: gajendra.nagar

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