
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : मेट्रो रूट के अंडरग्राउंड काम की कार्ययोजना में बदलाव हो चुका है। नई कार्ययोजना से अंडरग्राउंड काम का अलाइनमेंट ही बदल गया है। इसके चलते 22 अगस्त 2024 का गजट संशोधन जरूरी है। साथ ही गजट संशोधन के साथ प्रकाशन भी जरूरी है।
मेट्रो के नए प्लान की वजह से 20 से 25 हजार भवन प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन किसी को इसकी जानकारी नहीं है। मेट्रो रूट के दोनों तरफ के मकानों से अतिरिक्त कर वसूला जाएगा, लेकिन जनता को इसकी जानकारी ही नहीं दी गई। स्थिति स्पष्ट की जाना चाहिए।
यह बात मेट्रो के अंडरग्राउंड काम को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने वाले किशोर कोडवानी ने मंगलवार को हाई कोर्ट में कही। उन्होंने कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट के अंडर ग्राउंड काम की वजह से भूमिगत जल विखंडित होगा, लेकिन कोई इस बिंदु पर विचार करने को तैयार नहीं है।
नई कार्ययोजना के तहत बदले अलाइनमेंट का गजट संशोधन भी नहीं किया गया है। पुरातात्विक भवनों के 200 मीटर क्षेत्र के भीतर इस प्रोजेक्ट को बनाया जा रहा है। जबकि नियमानुसार इस हिस्से में खोदाई या अन्य निर्माण नहीं हो सकते। पेड़ों को भी बेवजह काटा जा रहा है। नई कार्ययोजना बनाकर नियमों की अनदेखी की जा रही है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद मेट्रो कॉर्पोरेशन से कहा कि वह स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। फिलहाल मेट्रो के अंडर ग्राउंड काम पर कोई रोक नहीं है। काम जारी रहेगा। अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।
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