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इंदौर में 32 साल से स्कीम 171 से मुक्ति का इंतजार, अब सोसायटियों की फिर होगी जांच

Indore News: आईडीए की स्कीम 171 में 13 सोसायटियों को बाहर करने के लिए दिसंबर 2024 में 5.89 करोड़ जमा हो चुके हैं, फिर भी मुक्त नहीं किया गया।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 11:53:12 AM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 11:59:58 AM (IST)
इंदौर में 32 साल से स्कीम 171 से मुक्ति का इंतजार, अब सोसायटियों की फिर होगी जांच
इंदौर विकास प्राधिकरण का कार्यालय। फाइल फोटो

HighLights

  1. सात दिन में पूरा करना है नौ संस्थाओं का ऑडिट, चार का ही है अपडेट
  2. कलेक्टर शिवम वर्मा ने जांच अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पवार को सौंपी
  3. 7 दिन में ऑडिट पूरा करने और सदस्यता सूची अपडेट करने के निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की स्कीम-171 में शामिल 13 सोसायटियों को योजना से बाहर करने की प्रक्रिया एक बार फिर जांच के दौर में पहुंच गई है। इन सोसायटियों और अन्य कालोनियों की ओर से स्कीम से मुक्ति के लिए दिसंबर 2024 में ही आइडीए के पास 5.89 करोड़ रुपये जमा कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक उन्हें स्कीम से मुक्त नहीं किया गया है। छह हजार प्लाटधारक 32 वर्षो से इस मामले में राहत का इंतजार कर रहे हैं।

दरअसल, कलेक्टर शिवम वर्मा ने 13 सोसायटियों की जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पवार को सौंपी है। अपर कलेक्टर द्वारा बीते सप्ताह कलेक्ट्रेट में सभी संबंधित सोसायटियों के अध्यक्षों और प्रशासकों की बैठक ली गई। बैठक में सामने आया कि अधिकांश सोसायटियों का ऑडिट कई वर्षों से लंबित है। केवल चार संस्थाओं का ऑडिट ही समय पर हुआ है।


इसे गंभीरता से लेते हुए शेष नौ सोसायटियों को सात दिन में ऑडिट पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान सोसायटियों के सदस्यों की वरिष्ठता सूची भी अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके आधार पर यह भी देखा जाएगा कि संबंधित सोसायटियों में सदस्यता और प्लाट आवंटन की स्थिति क्या है। अपर कलेक्टर नवजीवन पवार का कहना है कि संस्थाओं का सात दिन में आडिट पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, लगातार समीक्षा भी की जाएगी।

सहकारिता विभाग के अधिकारियों को नोटिस

कई सोसायटियों में प्रशासक नियुक्त होने के बावजूद वर्षों से आडिट नहीं कराया गया, जबकि प्रत्येक वर्ष ऑडिट कराया जाना चाहिए। ऑडिट कराने की जिम्मेदारी सहकारिता विभाग के अधिकारियों की होती है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर कलेक्टर नवजीवन पवार ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

इन सोसायटियों की जांच

स्कीम-171 में शामिल प्रमुख सोसायटियों में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार संस्था, न्याय विभाग कर्मचारी संस्था, इंदौर विकास गृह निर्माण, मजदूर पंचायत, लक्ष्मण नगर गृह निर्माण, सूर्या गृह निर्माण और मारुति गृह निर्माण सहित 13 संस्थाएं शामिल हैं।

इनमें कई संस्थाओं का ऑडिट वर्ष 2007-08 से लेकर 2023-24 तक ही हुआ है, जबकि मारुति गृह निर्माण, श्रीकृपा गृह निर्माण, अप्सरा गृह निर्माण, सन्नी गृह निर्माण संस्था का आडिट 2024-25 तक पूरा है। इसमें संजना गृह निर्माण का ऑडिट तो 2017-18 तक ही हुआ है।

राशि जमा, फिर भी नहीं मिली राहत

स्कीम-171 में 13 सोसायटियों के अलावा अन्य कॉलोनियां शामिल हैं, लेकिन आईडीए ने योजना घोषित करने के बावजूद यहां पर विकास कार्य नहीं किए। दस साल से अधिक तक किसी योजना में विकास कार्य नहीं करने पर जमीनों को योजना से बाहर करने का प्रविधान है, लेकिन योजना में शामिल जमीनों को अब तक मुक्त नहीं किया गया।

इसलिए यहां के प्लाटधारक निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे हैं। आईडीए ने योजना से सोसायटियों और कॉलोनियों को मुक्त करने के लिए विकास शुल्क जमा कराया था। इसके बावजूद दो साल से प्रक्रिया अटकी हुई है।

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