
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में वर्षों पुरानी नर्मदा पेयजल लाइन जर्जर हो चुकी है। इस कारण लीकेज के चलते सीवरेज और दूषित पानी पेयजल में मिल रहा है। यह स्थिति शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है। नगर निगम ने 550 किलोमीटर पुरानी पेयजल लाइन को चिह्नित किया है, जिन्हें बदलने की योजना अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई है।
हालांकि, अभी तक इस कार्य के लिए कोई एजेंसी निर्धारित नहीं की गई है। एजेंसी के चयन के बाद पाइप लाइनों के बदलाव में समय लगेगा, जिससे शहरवासियों को अगले एक से दो वर्षों तक दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
शहर में नर्मदा पेयजल की पुरानी सीमेंट की लाइनें स्थापित हैं। इन लाइनों में क्रैक या लीकेज होने पर पेयजल में मिट्टी मिल जाती है। इसके अलावा, यदि आसपास का ड्रेनेज चैंबर भर जाए तो उसका पानी भी रिसाव के माध्यम से नर्मदा पेयजल लाइन में मिल जाता है।
अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत शहर में कुल दो हजार करोड़ रुपये के कार्य किए जाने हैं। इसमें 1400 किलोमीटर की नई नर्मदा पाइप लाइन और 40 नई पानी की टंकियों का निर्माण शामिल है। साथ ही, 550 किलोमीटर पुरानी पाइप लाइनों का भी बदलाव किया जाएगा। नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के तहत चार पैकेज में कार्य करने की योजना बनाई है। पहले पैकेज के लिए कोलकाता की एसपीएमएल कंपनी को दो महीने पहले जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह कंपनी जलूद में 1650 एमएलडी का इंटेक वेल और 400 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाएगी। इसके लिए कंपनी ने सर्वेक्षण कार्य भी शुरू कर दिया है। पाइप लाइन और टंकी निर्माण के तीन पैकेज के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन एजेंसी का चयन अभी बाकी है। उल्लेखनीय है कि इंदौर में वर्ष 2018 में अमृत-1 प्रोजेक्ट के तहत 600 करोड़ रुपये की लागत से 27 पानी टंकियों का निर्माण किया गया था और पेयजल वितरण लाइनें डाली गई थीं।