बाढ़ के खतरों से पहले ही सचेत करेगा एप्लीकेशन, IIT इंदौर के सिविल डिपार्टमेंट ने बनाया App
आने वाले वर्षों में भारतीय शहरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में जोखिम का समय रहते आकलन करने वाली तकनीक बेहद जरूरी बन जाती है। पारंपरिक तरीकों में ज्यादातर पुराने रिकार्ड, मैनुअल डेटा और जमीनी सर्वे पर निर्भरता होती थी, जो समय लेने वाले और बदलते शहरी परिदृश्य को सटीक रूप से दर्शाने में कमजोर साबित होते हैं।
Publish Date: Sun, 30 Nov 2025 02:56:47 AM (IST)
Updated Date: Sun, 30 Nov 2025 03:03:27 AM (IST)
आईआईटी इंदौर।HighLights
- यह उन्नत भू-स्थानिक विश्लेषण, सैटेलाइट आधारित आंकड़ों का इस्तेमाल करेगा।
- उन क्षेत्रों की पहचान होगी जहाँ मानसून में बाढ़ आने की संभावना अधिक रहती है।
- यह एप्लीकेशन हर वर्ष शहरों में बाढ़ के खतरे का विस्तृत आकलन तैयार करता है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के शोधकर्ताओं ने शहरी बाढ़ जोखिम निगरानी एप्लीकेशन तैयार किया है, जो भारतीय स्मार्ट शहरों में बढ़ते बाढ़ खतरे का पहले से आकलन कर सकेगा। इस एप्लीकेशन को सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मनीष कुमार गोयल और शोधकर्ता विजय जैन की टीम ने विकसित किया है।
यह वर्ष 1980 से अब तक के सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके बताता है कि शहरों में बाढ़ का खतरा समय के साथ कैसे बदल रहा है। शहरों का तेजी से विस्तार, जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के कारण बाढ़ एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।
अचानक होने वाली भारी वर्षा से ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ठप हो सकती है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और कई बार लोगों की जान-माल पर बड़ा खतरा पैदा होता है।
सैटेलाइट से लेंगे डेटा
- यह नया एप्लीकेशन उन्नत भू-स्थानिक विश्लेषण और सैटेलाइट आधारित आंकड़ों का इस्तेमाल करेगा।
- यह हर वर्ष शहरों में बाढ़ के खतरे का विस्तृत आकलन तैयार करता है।
- सबसे पहले यह उच्च-रिजाल्यूशन सैटेलाइट वर्षा डेटा की मदद से वार्षिक वर्षा के पैटर्न को समझता है।
- इसके बाद जल विज्ञान (हाइड्रोलाजी) और स्थलाकृति (टोपोग्राफी) के आंकड़ों का उपयोग करके यह अनुमान लगाता है कि शहर के किस हिस्से में भारी बारिश के दौरान पानी कितनी गहराई तक जमा हो सकता है।
- इससे उन क्षेत्रों की पहचान हो जाती है जहाँ मानसूनी महीनों में बाढ़ आने की संभावना अधिक रहती है।
काफी सस्ता होगा ऐप
- यह एप्लीकेशन किफायती है, क्योंकि क्लाउड कंप्यूटिंग की मदद से ओपन-एक्सेस सैटेलाइट डेटा एकत्रित करेगा। इसलिए इसे देश के किसी भी शहर में आसानी से लागू किया जा सकता है।
- इसका सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल डिजाइन इसे गैर-विशेषज्ञों के लिए भी उपयोगी बनाता है। टीम भविष्य में इस उपकरण को और उन्नत बनाकर इसमें 3डी शहर दृश्य और भविष्य के बाढ़ जोखिम पूर्वानुमान शामिल करने पर भी काम कर रही है।
- निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने कहा कि यह नवाचार जलवायु लचीलेपन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- यह उपकरण प्रशासन को वास्तविक समय में वैज्ञानिक आंकड़े प्रदान करता है, जिससे शहरों और समुदायों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।