
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दूषित पानी से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। धार निवासी 69 वर्षीय बुजुर्ग की दूषित पानी पीने के बाद तबीयत बिगड़ी। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। शहर में दूषित पानी से होने वाली यह 17वीं मौत है। बुजुर्ग इंदौर में रह रहे बेटे के यहां आए हुए थे। वे भागीरथपुरा मंदिर दर्शन के लिए गए थे। वहां उन्होंने होटल में दूषित पानी पिया था।
मृतक के बेटे ने बताया कि शासन की घोषणा के बावजूद उनके पिता को निजी अस्पताल में निशुल्क उपचार नहीं मिला। अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि उनके पास इस संबंध में लिखित आदेश नहीं है। जिला प्रशासन भी उनके पिता की मौत दूषित पानी पीने की वजह होने की बात से इनकार कर रहा है।
इधर स्वास्थ्य विभाग ने भागीरथपुरा क्षेत्र को महामारी ग्रसित क्षेत्र मानकर स्वस्थ्यकर्मियों की टीमें मैदान में उतार दी हैं। घर-घर सर्वे किया जा रहा है। सोमवार को भी भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीज मिले। राहत की बात यह रही कि इनमें से ज्यादातर को प्राथमिक उपचार के बाद घर रवाना कर दिया गया। दूषित पानी की वजह से धार निवासी जिस व्यक्ति की मौत हुई है उनका नाम ओमप्रकाश शर्मा है। वे सेवानिवृत्त प्रधान आरक्षक थे और इंदौर में रह रहे बेटे के गौरव के यहां ठहरे हुए थे। लगभग एक सप्ताह पहले ने नंदानगर में रहने वाले रिश्तेदार के यहां गए थे। वहीं से वे भागीरथपुरा चले गए।
डॉक्टरों के अनुसार संक्रमण ओमप्रकाश शर्मा की किडनी तक फैल गया था। चार जनवरी की सुबह हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। स्वजन का कहना है कि ओमप्रकाश को किडनी की कोई बीमारी पहले से थी ही नहीं।
भागीरथपुरा निवासी इन दिनों पूरी तरह से टैंकरों पर आश्रित हैं। लगातार शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने जंग और काई लगे टैंकरों को जल प्रदाय कार्य से हटा लिया है। रहवासियों ने बताया कि क्षेत्र में सोमवार को जो जल वितरित किया गया वह अन्य दिनों के मुकाबले स्वच्छ और साफ था। कुछ निजी सामाजिक संगठन भी क्षेत्र में आरओ का पानी वितरित कर रहे हैं।
सोमवार को नगर निगम ने क्षेत्र के सार्वजनिक और निजी बोरिंग में दवाई डालने का अभियान शुरू किया। अभियान सतत जारी रहेगा। फिलहाल कुछ दिन क्षेत्र में बोरिंग चालू नहीं किए जाएंगे।
ओमप्रकाश शर्मा के बेटे गौरव ने बताया कि पिता की मौत के मामले में जिला प्रशासन से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। 29 और 30 दिसंबर को डायरिया की शिकायत के बाद पिता की हालत बिगड़ी। एक जनवरी को उन्हें बांबे अस्पताल में भर्ती कराया। पिता में दूषित जल से होने वाले सभी लक्षण पाए गए थे। कलेक्टर और सीएमएचओ को दूषित पानी पीने से बीमार होने की बात बताई भी थी। अधिकारियों ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन जब अस्पताल प्रबंधन से उपचार और आर्थिक सहायता को लेकर चर्चा की तो अस्पताल प्रबंधन ने लिखित आदेश के अभाव में मदद से इनकार कर दिया।
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गौरव ने कहा कि दिक्कत यह रही कि पिता का आधार कार्ड धार जिले का था, जबकि उपचार इंदौर में चल रहा था। मेरे पिता की मंदिर दर्शन के दौरान चाय-नाश्ते के समय दूषित पानी पीने से हालत बिगड़ी थी। तीन जनवरी की शाम स्थिति बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। गौरव ने सवाल उठाते हुए कहा कि बैक्टीरिया न तो क्षेत्र देखता है और न आधार कार्ड या कोई पहचान पत्र, फिर तकनीकी कारण पर सहायता से इनकार क्यों किया जा रहा है।
भागीरथपुरा कांड को स्वास्थ्य विभाग ने महामारी मान लिया है। इसी के प्रोटोकाल के हिसाब से मरीजों का उपचार और देखभाल की जा रही है। सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी ने कहा कि महामारी की परिभाषा ही यही है कि कहीं भी एक ही बीमारी के सामान्य से अधिक मरीज मिलते हैं तो उसे महामारी कहा जाता है। भागीरथपुरा क्षेत्र के लिए यह घटना महामारी हो सकती है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के प्रोटोकाल होते हैं। इसके हिसाब से ही टीमें भेजी जाती है। यह टीमें मरीजों का डाटा लेती है। इसके साथ ही किस तरह से चीजें हुई है, इसका क्या कारण है। हम बचाव के लिए क्या कर रह हैं, उसकी जानकारी प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही आरटीपीसीआर की जांच भी की जा रही है। यहीं कारण भी है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा महामारी मानते हुए घरों का सर्वे किया जा रहा है।