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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु के नाम पर ऑनलाइन ठगी की कोशिश, वाट्सएप पर मांगे रुपये

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय एक बार फिर ऑनलाइन ठगी करने वालों के निशाने पर है। पूर्व कुलगुरु डॉ. नरेंद्र धाकड़ और डॉ. रेणु जैन के बाद अब वर्तमान कुलगुरु...और पढ़ें

By Kapil NileyEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 07:37:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 07:37:33 PM (IST)
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु के नाम पर ऑनलाइन ठगी की कोशिश, वाट्सएप पर मांगे रुपये
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु के नाम पर ऑनलाइन ठगी की कोशिश। (एआई इमेज)

HighLights

  1. थाईलैंड में मोबाइल फोन नंबर है पंजीकृत
  2. फेसबुक-इंस्ट्राग्राम पर पोस्ट कर सतर्क रहने की दी हिदायत
  3. विश्वविद्यालय से जुड़े कई लोगों को संदेश भेजकर मांगे रुपये

कपिल नीले, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : देवी अहिल्या विश्वविद्यालय एक बार फिर ऑनलाइन ठगी करने वालों के निशाने पर है। पूर्व कुलगुरु डॉ. नरेंद्र धाकड़ और डॉ. रेणु जैन के बाद अब वर्तमान कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के नाम का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे मांगने का मामला सामने आया है।

ठग ने वाट्सएप के जरिए विश्वविद्यालय से जुड़े कई लोगों को संदेश भेजकर 10 से 25 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद मांगी। बताया जा रहा है कि संदेश थाईलैंड में पंजीकृत सिम कार्ड ( 66 638767402) से भेजे गए हैं। संदेश मिलने पर कुछ लोगों को शक हुआ।


उन्होंने तत्काल कुलगुरु डॉ. सिंघई से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। ऑनलाइन ठगी की आशंका सामने आते ही डॉ. सिंघई ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपने करीबी लोगों और परिचितों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी संदेश पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि किए कोई राशि ट्रांसफर न करें।

अनचाही एप हो जाती है डाउनलोड

साइबर एक्सपर्ट इतेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि कई बार मोबाइल यूजर को ई-मेल व वाट्सअप पर मैसेज प्राप्त होते है। उसमें स्लैमर व ठग हिडन एप्लीकेशन रखते है। जैसे ही ई-मेल और मैसेज पर क्लिक करते ही मोबाइल में अनचाही एप्लीकेशन डाउनलोड हो जाती है, जो यूजर्स के मोबाइल की एक्टिविटी की जानकारी स्लैमर तक पहुंचाती है। इसमें यूजर्स के डेटा, फोटो और कालिंग डिटेल शामिल रहती है। वे कहते है कि स्लैमर उनकी मोबाइल एक्टिविटी पर नजर रखते है। उसके बाद क्लोन व डुप्लीकेट अकाउंट क्रिएट कर आनलाइन ठगी की योजना बनाते है।

चक्षु पोर्टल पर करें शिकायत

चौहान कहते है कि पीड़ित का नाम इस्तेमाल कर यदि स्लैमर वाट्सअप पर लोगों को संदेश भेजते है तो इसकी संचार मंत्रालय ने चक्षु पोर्टल रखा है। इसमें वाट्सअप पर आए संदेशों की शिकायत कर सकते है। इसके माध्यम से मेटा तुरंत कार्रवाई कर स्लैमर द्वारा वाट्सअप को बंद कर सकता है। इससे बाकी लोगों के साथ धोखाधड़ी से बचाया जा सकता है। वे कहते है कि एेसे ही फर्जी ई-मेल के खिलाफ भी कंपनी को आवगत कराया जा सकता है। इसे तुरंत ई-मेल ब्लाक किया जा सकता है।

पांच साल में हुई ये घटनाएं

पहले खरीदवाए गिफ्ट वाउचर

  • 2021 में तत्कालीन कुलगुरु डा. रेणु जैन की फर्जी ई-मेल बनाया गया। वरिष्ठ प्राध्यापक डा. पीएन मिश्रा, डा. वसीम खान और डा. संगीता जैन सहित कई शिक्षकों को भी ई-मेल भेज गए थे। इसमें सभी लोगों से गिफ्ट वाउचर खरीदने को कहा गया। कुछ शिक्षकों ने दस-दस हजार रुपये के कुछ गिफ्ट वाउचर खरीदें थे।
  • छह महीने बीतने के बाद दोबारा डा. जैन का फर्जी ई-मेल किया गया। इस मर्तबा तत्कालीन कार्यपरिषद डा. रमेश मंगल को गिफ्ट वाउचर खरीदने को बोला गया।

पोर्टल पर अश्लील कंटेंट

2022 में विश्वविद्यालय (देअवीवी) की वेबसाइट पर भी साइबर अटैक हो चुका है। योग विभाग ने 2021 में एक डोमेन लिया था। मगर उस पर कोई गतिविधियां नहीं की गई। सबक्रिप्शन भी हटा दिया था। इसके चलते डोमेन भी कोई दूसरा इस्तेमाल कर रहा था। उस दौरान वेबसाइट पर योगा विभाग के पेज पर अश्लील वीडियो व फोटो अपलोड किए गए थे। फिर आइटी टीम को वेबसाइट से अश्लील कंटेंट हटाए।

बना फर्जी अकाउंट

अप्रैल 2026 में इंस्ट्राग्राम पर डीएवीवी का फर्जी अकाउंट्स बनाया गया। डीएवीवी के नाम, पहचान और आधिकारिक लोगो का उपयोग कर इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर अनधिकृत अकाउंट्स बनाए गए हैं, जिसमें डीएवीवीइंदौर64, डीएवीवी,डीएवीवी इंदौर, डीएवीवी 64 अकाउंट में विश्वविद्यालय का नाम और लोगो लगाया है।

कई लोगों ने किया संपर्क

मेरे नाम से कुछ लोगों को वाट्सएप पर मैसेज भेजकर रुपये मांगे गए है। उन्होंने मुझे इसकी जानकारी दी। फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों को सतर्क रहने को कहा है। इसकी शिकायत साइबर सेल में की जाएगी। -डॉ. राकेश सिंघई, कुलगुरु, डीएवीवी

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