
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में मल-मूत्र से दूषित पेयजल के कारण अब तक 16 लोगों की मौत के बाद हड़कंप की स्थिति है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी से होने वाला नुकसान केवल तात्कालिक उल्टी-दस्त तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर समय के साथ गंभीर और दीर्घकालिक रूप ले सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी में मौजूद ई-कोलाई, स्यूडोमोनास, साल्मोनेला, प्रोटियस, शिगेला और विब्रियो कालरा जैसे बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर पहले दस्त, उल्टी और डिहाइड्रेशन पैदा करते हैं। बाद में ये किडनी, लिवर, फेफड़ों, आंतों और इम्यून सिस्टम को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों में विकास रुक सकता है और बुजुर्गों में अंगों की कार्यक्षमता कमजोर पड़ सकती है।
(डॉ. योगेश शाह, कंसल्टेंट एवं आंतरिक रोग विशेषज्ञ, इंदौर)
दूषित पानी या भोजन से बैक्टीरिया आंतों में लंबे समय तक सूजन पैदा कर सकते हैं, जिसे कोलाइटिस कहा जाता है। यह स्थिति आगे चलकर क्रोनिक किडनी डिजीज का कारण बन सकती है। कुछ मामलों में लिवर एब्सेस भी बनता है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते। इसके अलावा एंटअमीबा हिस्टोलिटिका परजीवी आंतों में रहकर बाद में लिवर तक पहुंच सकता है और अमीबिक लिवर एब्सेस पैदा करता है। यह समस्या अस्वच्छ पेयजल वाले क्षेत्रों में आम है।
(डॉ. यशवंत पंवार, कंसल्टेंट फिजिशियन एवं एसोसिएट प्रोफेसर, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर)
दूषित पानी या भोजन के बाद बुखार, बदन दर्द, उल्टी-दस्त आम लक्षण हैं। कई बार दस्त के साथ खून आना गंभीर संकेत होता है। लगातार डिहाइड्रेशन से किडनी और ब्रेन पर असर पड़ सकता है। गंभीर मामलों में मरीज बेहोशी या कोमा तक जा सकता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।