
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने और पीड़ितों को जल्द राहत दिलाने के लिए इंदौर पुलिस ने शुक्रवार को विभिन्न सरकारी, ग्रामीण और निजी बैंकों के नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की।
बैठक में यह तय किया गया कि साइबर ठगी के मामलों में बैंक और पुलिस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान पहले से अधिक तेज और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि ठगी की रकम जल्द रोकी जा सके और पीड़ितों को वापस दिलाई जा सके।
रीगल चौराहा स्थित सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता पुलिस उपायुक्त (अपराध) राजेश त्रिपाठी ने की। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त मीना चौहान, सहायक पुलिस आयुक्त नीलम कनोज, अपराध शाखा की साइबर टीम तथा विभिन्न बैंकों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि समय रहते बैंक और पुलिस मिलकर कार्रवाई करें तो ठगी की रकम अपराधियों तक पहुंचने से पहले रोकी जा सकती है। इसी उद्देश्य से बैंकों को निर्देश दिए गए कि जांच के दौरान मांगी गई जानकारी निर्धारित समय में उपलब्ध कराई जाए और शिकायतों के निराकरण में किसी प्रकार की देरी न हो।
बैठक में राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर शिकायतों के त्वरित निराकरण, न्यायालय के आदेशों का शीघ्र पालन कर रोकी गई राशि पीड़ितों को लौटाने तथा धन वापसी और शिकायत निवारण से जुड़े तंत्र का अधिक प्रभावी उपयोग करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैंकों से कहा गया कि वे अपने ग्राहकों को साइबर ठगी से बचाव के प्रति लगातार जागरूक करें। साथ ही संदिग्ध और फर्जी खातों की पहचान, सत्यापन तथा निगरानी की व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए, ताकि अपराधियों के लिए बैंकिंग व्यवस्था का दुरुपयोग करना मुश्किल हो सके।
इंदौर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय ठगी का शिकार हों तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर सहायता संख्या 1930 पर सूचना दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना मिलने पर पुलिस और बैंक मिलकर संबंधित खाते और मोबाइल नंबर तत्काल रोक सकते हैं, जिससे ठगी की राशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।