सुमेधा पुराणिक चौरसिया, इंदौर। घर में हम जिन वस्तुओं को बेकार और भंगार समझकर बाहर कर देते हैं, वही वस्तुएं एक स्कूल को खूबसूरत रंग दे रही हैं। दीवारों पर रंगाई-पुताई करने के लिए रुपए नहीं थे तो उन्हें रंगबिरंगी साड़ी-दुपट्टे से सजा दिया गया। जो दरियां फटने के कारण बच्चों के बैठने लायक नहीं बची थीं, उन्हें फेंकने के बजाय छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर कटआउट बनाए गए।

स्कूल की खूबसूरती से आकर्षित होकर यहां पढ़ने के लिए उन बच्चों की भीड़ लगी रहती है, जिनके माता-पिता फीस नहीं भर सकते। खजराना क्षेत्र में गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए बीते चार वर्षों से एनजीओ 'नींव" निशुल्क स्कूल संचालित कर रहा है। इस वर्ष स्कूल के पास रंगरोगन के लिए रुपए नहीं थे तो उन्होंने 'बेस्ट फ्रॉम द वेस्ट" पद्धति का उपयोग किया।

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एनजीओ के पास 'नीड नींव बैंक' में कई लोग घर का पुराना और बेकार हो चुका सामान देकर जाते हैं। यही सामान इस बार स्कूल की साजसज्जा के काम में लिया गया। बच्चों और संस्था में काम करने वाले सदस्यों ने स्कूल को देखते ही देखते इतना सुंदर रूप दे दिया कि यहां रोज कई लोग सिर्फ स्कूल की सजावट देखने आ रहे हैं।

नींव ने रखी खूबसूरती की बुनियाद

-खजराना में गरीब बच्चों का स्कूल 'बेस्ट फ्रॉम द वेस्ट" की मिसाल बना

-घरों से फेंके कबाड़ और पुराने कपड़ों से सजी दीवार

बेकार सामान बना जरिया

नींव की पंखुरी किरणप्रकाश बताती हैं कि संस्था द्वारा बेकार और बिना काम का सामान इकट्ठा किया जाता है। इसी सामान को हमने स्कूल में सजावट का जरिया बना लिया। इससे रंगाई-पुताई का खर्च बच गया। एक छात्र की परिजन रोशन बाजी, यहां पढ़ने वाला छात्र 12 साल का सूजल और परिजन सबीना खान ने स्कूल को खूबसूरत बना दिया। स्कूल में एक बैच में 50 बच्चे पढ़ाई करते हैं। स्कूल में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षा दी जा रही है।

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रंगरोगन के पैसे नहीं थे तो पुरानी दरी से 'रंग-बिरंगा' बना दिया स्कूल