• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड : रहवासी तीन महीने से कर रहे थे शिकायत, जनप्रतिनिधियों ने कुछ किया ही नहीं

भागीरथपुरा के रहवासी घटना के तीन महीने पहले से शिकायत कर रहे थे कि क्षेत्र में दूषित पानी आ रहा है, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 01 Sep 2026 10:47:23 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Sep 2026 07:28:28 AM (IST)
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड : रहवासी तीन महीने से कर रहे थे शिकायत, जनप्रतिनिधियों ने कुछ किया ही नहीं
भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई थी कई मौतें और कई लोग हो गए थे बीमार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. टंकी का रखरखाव करने वाली निजी एजेंसी की भूमिका की जांच ही नहीं हुई
  2. यह बात हाई कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अवलोकन में सामने आई है
  3. समय रहते जनप्रतिनिधि शिकायत का संज्ञान ले लेते तो हादसा टाला जा सकता था

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : भागीरथपुरा के रहवासी घटना के तीन महीने पहले से शिकायत कर रहे थे कि क्षेत्र में दूषित पानी आ रहा है, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। एक दो नहीं दर्जनों लोगों के बयान में यह बात सामने आई है।

यह बात हाई कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अवलोकन में सामने आई है। मंगलवार को भी वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया सहित कई वकील रिपोर्ट का अवलोकन करने रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे। बागडिया ने कहा कि रिपोर्ट के अवलोकन से यह तो साफ है कि समय रहते जनप्रतिनिधि नागरिकों की शिकायत का संज्ञान ले लेते तो हादसा टाला जा सकता था। बावजूद इसके किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा नहीं की गई।


रखरखाव करने वाली एजेंसी से पूछताछ तक नहीं की

शहर में 110 टंकियां हैं। इन सभी का रखरखाव रामकी लिमिटेड नामक कंपनी के पास है। कंपनी ने प्रत्येक टंकी पर अपने दो-तीन कर्मचारी तैनात किए हुए हैं। इसके अलावा नगर निगम भी दो-तीन कर्मचारी प्रत्येक टंकी पर तैनात कर रखता है। भागीरथपुरा टंकी पर भी हादसे के वक्त निगम और कंपनी के कर्मचारी तैनात थे, बावजूद इसके न कंपनी को क्लिनचीट दे दी गई।

जब नक्शा ही नहीं है तो कैसे करवा रहे थे काम

इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) ने जांच आयोग को जो दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं उनके अनुसार वर्ष 1990-92 के बीच आइडीए ने भागीरथपुरा में डाली गई पाइप लाइनों का नक्षा और अन्य दस्तावेज नगर निगम को सौंप दिए थे, जबकि निगमायुक्त ने आयोग को दिए बयान में कहा है कि निगम के पास ये नक्शा वर्तमान में नहीं है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नगर निगम के पास पाइप लाइन का नक्षा ही नहीं है तो फिर इन लाइनों का रखरखाव कैसे हो रहा था। निगम ने पाइप लाइन के काम के टेंडर किस आधार पर जारी किए थे। बागडिया ने बताया कि रिपोर्ट में तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को लेकर कहा गया है कि उन्होंने आशय पत्र (लेटर आफ इंटेंट) जारी नहीं किया, लेकिन सवाल तो यह है कि आशय पत्र जारी करना तो एमआइसी का काम है। अपर आयुक्त कैसे किसी एजेंसी को आशय पत्र जारी कर सकते हैं।

अवलोकन की नई व्यवस्था लागू, बारी-बारी आएगा नंबर

मंगलवार को रिपोर्ट अवलोकन के दौरान कुछ वकीलों में विवाद हो गया। इसके बाद रिपोर्ट अवलोकन के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी गई। अब अवलोकन से पहले वकीलों को एक फार्म भरकर देना होगा। इसके बाद उन्हें अवलोकन के लिए समय दिया जाए। वकील निर्धारित समय में ही रिपोर्ट का अवलोकन कर सकेंगे।

यह भी पढ़ें- दूषित पानी पर एमपी सरकार का बड़ा फैसला: अब हर बोरिंग, कुएं और तालाब का बनेगा हेल्थ रिपोर्ट कार्ड