By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 16 Nov 2022 08:30:06 AM (IST)Updated Date: Wed, 16 Nov 2022 07:23:38 PM (IST)
Bhairav Ashtami Today: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शिव के अंश कालभैरव की जयंती (भैरव अष्टमी) बुधवार को हर्षोल्लास से मनाई जा रही है। भैरव मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान होंगे। कहीं महाकाल स्वरूप में श्रृंगार होगा तो कहीं आठ प्रहर में 21 प्रकार से आरती होगी। अष्टमी का उल्लास सोमवार से ही मंदिरों में दिखाई देने लगा था। मंगलवार शाम रामबाग मुक्तिधाम स्थित भैरव मंदिर से शाही सवारी निकाली गई।
ज्योतिर्विद् कान्हा जोशी के मुताबिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव जयंती मनाई जाती है। अष्टमी तिथि 16 नवंबर को सुबह 5.49 से 17 नवंबर सुबह 7.57 बजे तक रहेगी। शिव के अंश कालभैरव को काशी का कोतवाल माना जाता है। उनकी पूजा के बिना शिव की पूजा अधूरी मानी गई है। इस दिन कालभैरव के साथ ही दुर्गा की पूजा भी करनी चाहिए। ज्योतिष और तंत्र-मंत्र में कालभैरव जयंती का विशेष महत्व है।
इन कार्यों से प्रसन्न होते हैं काशी के कोतवाल
ज्योतिर्विद् आचार्य शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि नींबू की पांच माला चढ़ाने से भैरव बाबा प्रसन्न होते हैं। सवा सौ ग्राम काली उड़द, सवा सौ ग्राम काले तिल सवा मीटर काले कपड़े में बांधकर भगवान भैरव को अर्पित करने से कई ग्रहदोष दूर होते हैं। सुबह भैरव मंदिर में अबीर, गुलाल, चावल, नीले फूल और सिंदूर चढ़ाएं। इससे शत्रुओं पर विजयी प्राप्त होती है। काले कुत्ते को रोटी खिलाने से शनि और केतु दोष दूर होते हैं।
सुबह 5 से रात 12 बजे तक होगी आरती
मंशापूर्ण कालभैरव धाम किला मैदान पर भैरव अष्टमी हर्षोल्लास से मनाई जा रही है। मंगलवार को आराध्य का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। व्यवस्थापक नीलेश गोयल ने बताया कि प्रकट दिवस पर में अष्ट प्रहर आरती की जाएगी। शुरुआत सुबह 5 बजे मंगल आरती के साथ हुई। रात 12 बजे शयन आरती होगी। शाम 7 बजे महाआरती और 56 भोग लगाया जाएगा। भगवान की 21 तरह से आरती होगी। खप्पर से कपूर आरती, मशाल आरती, कपड़ा, मदिरा, भोग, इत्र, श्रीफल और मुद्रा सहित अन्य सामग्री से 21 प्रकार की आरती की जाएगी। कालभैरव भक्त मंडल द्वारा भैरव अष्टमी पर महाप्रसादी का वितरण और संतों का सम्मान पंचकुइया मुक्तिधाम में किया जाएगा। संयोजक वैभव बाहेती, यशदीप सोलंकी, गोपाल बोरीवाल और कमल बागन ने बताया कि सुबह अभिषेक, हवन और शाम को 6.30 बजे श्रृंगार व आरती होगी। 17 नवंबर को संत समागम व सम्मान समारोह होगा।
बटुक भैरव के साथ होगा शीतलामाता और अन्नपूर्णा पूजन
एरोड्रम रोड स्थित श्रीविद्याधाम में महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सान्निध्य और आचार्य पं. राजेश शर्मा के निर्देशन में भैरव अष्टमी पर विभिन्न अनुष्ठान होंगे। आश्रम परिवार के पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि सुबह 8.30 बजे रुद्राभिषेक, शोडषोपचार पूजन, गोदुग्ध से अभिषेक और शाम 5 बजे 56 भोग अर्पित कर पुष्प बंगला सजाया जाएगा। फिर महाआरती होगी। बटुक भैरव के साथ शीतलामाता और मां अन्नपूर्णा का पूजन किया जाएगा। रात 8 बजे गौरी अग्रवाल की भजन संध्या व श्याम शरणमं म्यूजिकल ग्रुप द्वारा संगीतमय प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी।
रामबाग मुक्तिधाम से निकली शाही सवारी
रामबाग मुक्तिधाम में कालभैरव का अष्टमी पर महाकाल के रूप में श्रृंगार किया जाएगा। इस अवसर पर छप्पन भोग लगाकर आरती की जाएगी। इसके बाद भंडारा और भजन संध्या होगी। कालभैरव भक्त मंडल के दिलीप माने ने बताया कि अष्टमी की पूर्व संध्या पर आराध्य की शाही सवारी निकाली गई। यात्रा मामा-भानजे की दरगाह, वीआइपी चौराहा, चिकमंगलूर, नगर निगम, छत्रपति शिवाजी पेड़ी से पुन: मंदिर पर समाप्त हुई।