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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

IT विभाग का बड़ा खुलासा, फेक टैक्स रिफंड केस में Indore का CA भी शामिल

देशभर में करीब 200 जगह ऐसी छापेमारी एक साथ होने की सूचना है। राजनीतिक पार्टियों के चंदे की रसीदें, मेडिकल के फर्जी बिल से लेकर ट्यूशन फीस और निवेश के ...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 14 Jul 2025 08:15:48 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Jul 2025 08:15:48 PM (IST)
IT विभाग का बड़ा खुलासा, फेक टैक्स रिफंड केस में Indore का CA भी शामिल
दान-चंदे की फर्जी रसीदों से हो रही चोरी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। फर्जी रसीदों-दस्तावेजों से आयकर की चोरी कर टैक्स रिफंड दिलवाने वाले टैक्स पेशेवर आयकर के निशाने पर आ गए हैं। सोमवार को आयकर विभाग की इंवेस्टिगेशन विंग ने इंदौर में छापेमारी की। नवलखा के पुखराज कार्पोरेट टावर स्थित एस लड्डा एंड एसोसिएट्स जांच के दायरे में है। आयकर रिटर्न में फर्जी दान और खर्च की रसीदें लगाकर सरकार को टैक्स का चूना लगाने के आरोप है। इन रसीदों से आयकर का रिफंड भी हासिल किया गया। आयकर विभाग ने सीए शुभम लड्डा, निखिल मंत्री और सहयोगियों से पूछताछ की।

देशभर में करीब 200 जगह ऐसी छापेमारी

देशभर में करीब 200 जगह ऐसी छापेमारी एक साथ होने की सूचना है। राजनीतिक पार्टियों के चंदे की रसीदें, मेडिकल के फर्जी बिल से लेकर ट्यूशन फीस और निवेश के फर्जी दस्तावेज-रसीदें बनाकर टैक्स चोरी के इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है। नौकरीपेशा वेतन भोगियों को फर्जी रसीदों से आयकर बचाने और टैक्स का रिफंड दिलाने का संगठित खेल करीब तीन वर्ष पूर्व कश्मीर में सबसे पहले उजागर हुआ था। वहां पुलिस वालों व कई शासकीय कर्मचारियों पर भी फर्जी दस्तावेजों से रिफंड लेने का खुलासा आयकर ने किया था। इसके बाद हैदराबाद और फिर देशभर में ऐसे मामले पकड़े गए थे।


CA और कर सलाहकार ही फर्जीवाड़े में शामिल

पता चला था कि टैक्स चोरी और उसका रिफंड दिलाने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर सलाहकार ही फर्जीवाड़े में शामिल है। एक ही जगह से थोकबंद तरीके से ऐसे रिटर्न दाखिल हो रहे हैं। ताजा कार्रवाई में इंवेस्टिगेशन विंग कम्प्यूटर के आइपी एड्रेस के आधार पर इंदौरे के सीए के ठिकानों पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि निजी कंपनियों में मोटा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को टैक्स बचाने और रिफंड हासिल करने का लालच देकर उनका इनकम टैक्स दाखिल करने का काम लिया जाता। इस सबके लिए रिटर्न दाखिल करते हुए फर्जी रसीदों को लगाया जाता।

उज्जैन के सीए नीरज जैन के यहां भी हुई थी कार्रवाई

ऐसे गुमनाम राजनीतिक दल जो चुनाव भी नहीं लड़ते उनके दान की रसीद खुद चार्टर्ड अकाउंटेंट व पेशेवर बनाकर देते। कमीशन व फीस के बदले यह काम होता और फिर पूरा टैक्स न चुकाकर इस दान व खर्च के आधार पर आयकर की धारा 80 जीजीसी में टैक्स छूट मांगी जाती। रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता को आयकर से टैक्स का रिफंड भी मिल जाता। गारंटीड रिफंड दिलाने का लालच देकर थोकबंद ऐसे रिटर्न भरे जाते। उज्जैन में एक जगह से 1100 रिटर्न बीते महीनों में आयकर विभाग ने उज्जैन के एक सीए नीरज जैन के यहां भी कार्रवाई की थी।

एक ही स्थान करीब दाखिल किए गए थे 1100 रिटर्न

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार तब भी एक ही स्थान व चुनिंदा कम्प्यूटरों से करीब 1100 रिटर्न दाखिल किए गए थे। इनमें से ज्यादातर में रिफंड लिया गया था। इसके लिए भी फर्जी दान-चंदा व खर्च की रसीदें तैयार की गई। आयकर विभाग ऐसे करदाताओं पर ब्याज व पेनाल्टी लगाने की कार्रवाई तो कर ही रहा है। टैक्स चोरी की भूमिका तैयार कर रिटर्न दाखिल करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट के विरुद्ध इंस्टिट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आफ इंडिया (ICAI) को पत्र लिखकर कार्रवाई की सिफारिश कर रहा है। ताकि इनके प्रेक्टिस की अनुमति रद्द की जा सकी।