
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत हो गई है। इलाके में नगर निगम के टैंकर पानी सप्लाई कर रहे हैं। इसके साथ ही नगर निगम की गाड़ियों के द्वारा रहवासियों के लिए अनाउंसमेंट किया जा रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि पानी को 15 मिनट उबालने और फिर उसे छानने के बाद ही इसका उपयोग करें। इलाके में कई लोग पहले ही यह सतर्कता बरत रहे हैं और कुछ तो आरओ वॉटर का कैन लाकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
जिस दूषित पानी ने भागीरथपुरा में 15 जिंदगियां लील ली, उस पानी में मल-मूत्र कहां से मिला, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला का कहना है कि नगर निगम भले ही दावा कर रहा हो कि उसने लीकेज तलाश लिया है, लेकिन लीकेज अब तक मिला ही नहीं है। वाघेला ने भागीरथपुरा में 15 मौत की बात भी स्वीकारी है। उनका कहना है कि ये मौतें एक सप्ताह के दौरान हुई हैं।
भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से लगातार मौत के बाद नगर निगम ने क्षेत्र में लीकेज तलाशने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई थीं। इसी दौरान पुलिस चौकी के पास नगर निगम की टीम को पानी की मेन लाइन के ऊपर शौचालय बना मिला।
खोदाई करने पर पता चला था कि इसी शौचालय से मल-मूत्र पानी की लाइन में मिल रहा था। नगर निगम की टीम ने इस लीकेज को सुधार दिया। इधर शुक्रवार को स्थानीय पार्षद वाघेला ने मीडिया से कहा कि लीकेज अब तक मिला ही नहीं है।

इंदौर में अग्रवाल समाज द्वारा भागीरथपुरा के सभी घरों में पानी के कैन सप्लाई किए जा रहे हैं।
29 दिसंबर : दूषित पानी पीने के बाद भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के 100 से अधिक मरीज सामने आए। तीन दिन से लोग शिकायत कर रहे थे, प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव अस्पताल पहुंचे।
30 दिसंबर : आठ मरीजों की मौत। 1100 से अधिक बीमार। नगर निगम ने सैंपल जांच को भेजे। दो अधिकारी निलंबित, एक की सेवा समाप्त। पता चला कि नर्मदा लाइन पर ड्रेनेज चैंबर बने थे, पुलिस चौकी का टायलेट भी इसी पाइप लाइन पर बना डाला।
31 दिसंबर : मृतक संख्या 13 पहुंची। हाईकोर्ट ने तलब की रिपोर्ट। मुख्यमंत्री इंदौर पहुंचे। अस्पतालों का दौरा किया। दो-दो लाख के मुआवजे का एलान। अधिकारियों की बैठक ली। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान। वीडियो वायरल।
1 जनवरी : जांच रिपोर्ट में खुलासा- मल-मूत्र मिला पानी पी रहे थे रहवासी। एक और मरीज की मौत। कुल संख्या 14 हुई। 2800 से अधिक बीमार। 201 अस्पताल में भर्ती। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का मुख्य सचिव को नोटिस।
2 जनवरी : महिला ने दम तोड़ा। 15वीं मौत। हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट पेश। सरकार ने चार लोगों की मौत स्वीकारी। प्रदेश सरकार ने नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाया। अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया।