• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 21, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पीपल्याहाना तालाब और जिला कोर्ट भवन के बीच बनाएंगे सीमा-चिन्ह, इसके बाद नए सिरे से बनेगी दीवार

कोर्ट भवन के लिए कहीं और उपयुक्त जमीन न मिलने पर पुन: उसी जगह निर्माण शुरू किया गया। इस बीच आंदोलन भी थम गया।

By gajendra.nagarEdited By: gajendra.nagar
Publish Date: Mon, 21 Jun 2021 09:55:42 AM (IST)Updated Date: Mon, 21 Jun 2021 09:55:42 AM (IST)
पीपल्याहाना तालाब और जिला कोर्ट भवन के बीच बनाएंगे सीमा-चिन्ह, इसके बाद नए सिरे से बनेगी दीवार

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और हाईकोर्ट के आदेशों के पालन में पीपल्याहाना तालाब की जमीन और जिला कोर्ट के निर्माणाधीन भवन के बीच सीमा-चिन्ह का निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद यहां नए सिरे से रिटेनिंग वाल दीवार बनेगी, ताकि तालाब की जमीन छूट जाए और बारिश के दौरान निर्माणाधीन भवन के अंदर पानी न घुसने पाए।

इसी सिलसिले में रविवार को जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार पालीवाल, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश आलोक मिश्रा, कलेक्टर मनीषसिंह, नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल, एसडीएम अंशुल खरे, तहसीलदार सुदीप मीणा सहित लोक निर्माण विभाग के अधिकारी पीपल्याहाना तालाब और निर्माणाधीन भवन के निरीक्षण के लिए पहुंचे। दरअसल, जिला कोर्ट के न्यायिक अधिकारी और भवन का निर्माण करवा रहे पीडब्ल्यूडी पीआइयू के अधिकारी चाहते हैं कि बारिश के पहले सीमा-चिन्ह तय होकर यहां रिटेनिंग वाल बना दी जाए, जिससे तालाब का पानी निर्माणाधीन क्षेत्र में न घुसने पाए। इसके लिए कलेक्टर ने तालाब के एफटीएल को लेकर पहले से बनी सहमति और तय सीमा के आधार पर तहसीलदार को सीमांकन के निर्देश दिए। सीमांकन के बाद सीमा-चिन्ह तय कर दिए जाएंगे। इसके बाद नए सिरे से रिटेनिंग वाल बनाई जाएगी। इस तरह कुछ साल पहले तालाब की सीमा में बनाई गई रिटेनिंग वाल को हटाया जा सकेगा।


तालाब बचाने को लेकर हुआ था संघर्ष, एनजीटी में पहुंचा था मामला

छह साल पहले जब पीपल्याहाना तालाब की जमीन पर जिला कोर्ट भवन के निर्माण की शुरुआत हुई थी तो क्षेत्र के जागरूक रहवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने जबर्दस्त विरोध किया था। इसके लिए महीनों तक आंदोलन चलता रहा। इस बीच कोर्ट भवन के लिए जमीन को अधीन करते हुए पीडब्ल्यूडी ने तालाब को बांटते हुए इसके बीच ही सीमेंट-कांक्रीट और लोहे के सरियों से रिटेनिंग वाल बना दी। जब राज्य शासन ने नहीं सुनी तो तालाब बचाओ समिति के कार्यकर्ताओं की ओर से एनजीटी में याचिका दायर की गई। एनजीटी ने तालाब को बचाते हुए कुछ शर्तों के साथ कोर्ट भवन निर्माण का आदेश दिया था। इसे लेकर जब-जब भी शर्तों का उल्लंघन हुआ कार्यकर्ता फिर आंदोलित होते रहे। तालाब के पक्ष में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी हस्तक्षेप किया था। तब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने तालाब बचाने का आश्वासन देकर कोर्ट निर्माण का काम रुकवाया था। साथ ही कोर्ट भवन के लिए दूसरी जमीन देखने का आश्वासन भी दिया। कोर्ट भवन के लिए कहीं और उपयुक्त जमीन न मिलने पर पुन: उसी जगह निर्माण शुरू किया गया। इस बीच आंदोलन भी थम गया।