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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 03, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Cancer Treatment: इंदौर के एमवाय अस्पताल में शुरू हुई ब्लड कैंसर मरीजों के लिए कार टी सेल थैरेपी

कार टी सेल थैरेपी की शुरुआत कई देशों में हो चुकी है। अमेरिका में इसी थैरेपी का खर्च चार करोड़ रुपये है, जबकि हमारे देश में यह एक-तिहाई लागत में होती ह...और पढ़ें

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sun, 03 Nov 2024 09:52:10 AM (IST)Updated Date: Sun, 03 Nov 2024 10:00:14 AM (IST)
Cancer Treatment: इंदौर के एमवाय अस्पताल में शुरू हुई ब्लड कैंसर मरीजों के लिए कार टी सेल थैरेपी
इंदौर का एमवाय अस्पताल। फाइल फोटो

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर(Indore MY Hospital)। शासकीय एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमवाय अस्पताल में ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए कार टी सेल थैरेपी शुरू की गई है। दावा देश के किसी शासकीय अस्पताल में पहली बार यह थैरेपी शुरू हुई है। हाल ही में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग और बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट ने बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया से पीड़ित मरीज पर इस थैरेपी का उपयोग किया गया।

डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि इस प्रक्रिया में मरीज के सफेद रक्त कणों को विशेष मशीन की मदद से एकत्रित किया गया, जिसके बाद जीन में बदलाव कर उन्हें कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने योग्य बनाया गया।


दूसरे देशों में हो चुकी है इस थैरेपी की शुरुआत

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20 दिन के बाद मरीज को वापस प्रत्यारोपित किया गया। अमेरिका, यूरोप, कनाडा, आस्ट्रेलिया, यूके जैसे देशों में इस थैरेपी की शुरुआत कुछ वर्ष पहले हो चुकी है, जबकि भारत में इस थैरेपी को आईआईटी मुंबई और टाटा मेमोरियल अस्पताल के सहयोग से विकसित किया गया है। वर्ष 2023 में भारत की केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा इसे व्यावसायिक रूप से मंजूरी दी गई।

यह कार टी सेल थेरेपी

कार टी सेल थैरेपी एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी है, जिसमें मरीज के टी सेल्स को पुन: प्रोग्राम किया जाता है, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उनका सफाया कर सकें। इस प्रक्रिया में पहले सफेद रक्त कणों को एकत्र कर टी सेल्स को अलग किया जाता है।

फिर, इन्हें एक विशेष रिसेप्टर- चाइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर्स के साथ जेनेटिकली इंजीनियर किया जाता है। यह रिसेप्टर्स टी सेल्स को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने में मदद करते हैं। बाद में इन कार टी सेल्स को नियंत्रित वातावरण में बढ़ाकर मरीज के शरीर में फिर से डाल दिया जाता है, जहां ये कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं।

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अमेरिका से सस्ती यहां

अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका में कार टी सेल थैरेपी का खर्च करीब चार करोड़ रुपये है, वहीं मध्य भारत में यह थैरेपी एक-तिहाई लागत में उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अधिक मरीजों तक इसकी पहुंच बढ़ सके।

ये है इसके लाभ

  • एचएलए मैचिंग की आवश्यकता नहीं है, जिससे इसकी उपलब्धता बढ़ जाती है।
  • सीडी4 और सीडी8 टी सेल्स के साथ काम करती है।
  • कैंसर कोशिकाओं के प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और ग्लाइकोलिपिड्स को लक्षित करती है।
  • तेजी से ट्यूमर-स्पेसिफिक टी सेल्स का निर्माण।
  • ग्राफ्ट-वर्सस-होस्ट डिजीज का जोखिम कम करती है।
  • एक बार की थैरेपी का दीर्घकालिक प्रभाव।

मरीजों को उन्नत उपचार मिलेगा

यह पहल मध्य भारत में ब्लड कैंसर उपचार में काफी मददगार साबित होगी, जिससे अधिक मरीजों को उन्नत उपचार प्राप्त हो सकेगा। - डॉ. अशोक यादव 
अधीक्षक, एमवाय अस्पताल