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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 16, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chaitra Navratri 2024: इंदौर के इस मंदिर में तड़के 4 बजे अभिषेक के लिए उमड़ता है भक्तों का हुजूम

प्रतिष्ठा के लिए मां तुलजा भवानी की मूर्ति जबलपुर में बनवाई गई थी। इसके बाद मूर्ति को महाराष्ट्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले जाया गया।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Tue, 16 Apr 2024 08:44:19 AM (IST)Updated Date: Tue, 16 Apr 2024 01:16:34 PM (IST)
Chaitra Navratri 2024: इंदौर के इस मंदिर में तड़के 4 बजे अभिषेक के लिए उमड़ता है भक्तों का हुजूम
इंदौर का तुलजा भवानी मंदिर

HighLights

  1. शहर में शक्ति के कई उपासना स्थल हैं।
  2. एक है शहर के पूर्वी क्षेत्र के रामनगर में तुलजा भवानी मंदिर।
  3. यहां छत्रपति शिवाजी महाराज की आराध्य तुलजा भवानी विराजित हैं।

Chaitra Navratri 2024 नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में शक्ति के कई उपासना स्थल हैं। इसमें से एक है शहर के पूर्वी क्षेत्र के रामनगर में तुलजा भवानी मंदिर। यहां छत्रपति शिवाजी महाराज की आराध्य तुलजा भवानी विराजित हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र में प्रतिदिन होने वाले अभिषेक में सैकड़ों श्रद्धालु उमड़ते हैं। यह अभिषेक तड़के 4 बजे दक्षिण भारतीय पद्धति से किया जाता है।

इतिहास

मंदिर का निर्माण 1986 में किया गया था। निर्माण की पहल समाजसेवी स्व. नवनाथ कोल्हे और ज्ञानदेव खाड़े ने की थी। प्रतिष्ठा के लिए मां तुलजा भवानी की मूर्ति जबलपुर में बनवाई गई थी। इसके बाद मूर्ति को महाराष्ट्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले जाया गया। इनमें तुलजापुर का तुलजा भवानी मंदिर, कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर, माहुर का रेणुकादेवी मंदिर, नासिक का सप्तशृंगी मंदिर शामिल है। इन साढ़े तीन शक्तिपीठों के अतिरिक्त शनि शिंगणापुर और शिर्डी भी शामिल है। इसके बाद इंदौर लाकर विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गई।


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नवरात्र में प्रज्जवलित होता है दीप स्तंभ

मंदिर के आसपास मराठी भाषियों का निवास है। यहां वर्षभर धार्मिक आयोजन होते हैं। यहां बने दीप स्तंभ को नवरात्र की अष्टमी और नवमी के साथ विशेष अवसर पर प्रज्ज्वलित किया जाता है। इसे निहारने लोगों का मेला लगता है। नवमी के दिन कन्या पूजन होता है। यहां होने वाले भंडारे में हजारों लोग भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। प्रज्ज्वलित दीप स्तंभ उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर की याद दिलाता है। यहां विराजित माता का मुख्य मंदिर तुलजापुर में है।

तुलजा भवानी देवी दुर्गा का ही एक रूप है। माता के इस स्वरूप का पूजन अधिकांश मराठी भाषी करते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज अपने प्रत्येक युद्ध से पहले माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। एक कथा के अनुसार मुगलों के आतंक से जनमानस को मुक्ति दिलाने के लिए मां तुलझा भवानी ने उन्हें तलवार प्रदान की थी।

- पुजारी अरुण बेडगे

यहां आने वाले भक्त मानते हैं कि शक्ति की उपासना से मनोबल ऊंचा रहता है। यहां कई वर्षों से आ रहा हूं और मैंने यह अनुभूति की है। यह भी एक कारण है कि भक्तों की माता के प्रति विशेष श्रद्धा है। यहां वैदिक परंपरा से पूजा अर्चना की जाती है।

- श्रीनिवास वळे, भक्त