
Chaitra Navratri 2024: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राजवाड़ा क्षेत्र में सुभाष चौक पर दुर्गा देवी मंदिर होलकर राजवंश के समय बनाया गया था। कालांतर में जीर्णोद्धार कर और भी सुंदर स्वरूप दिया गया है। लकड़ी की सुंदर नक्काशी वाले इस मंदिर में देवी दुर्गा की सफेद संगमरमर की मूर्ति स्थापित है। देवी दुर्गा की यह अष्टभुजा मूर्ति महिषासुर का मर्दन करती हुई है। मां की यह मूर्ति दिन में तीन बार रूप बदलती है। सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवा अवस्था और शाम को वृद्धावस्था के भाव मां के चेहरे पर नजर आते हैं।
मंदिर का निर्माण तुकोजीराव होलकर प्रथम ने कराया था। कहा जाता है कि तुकोजीराव होलकर को स्वप्न में मां दुर्गा ने दर्शन देते हुए बताया था कि उनकी यह मूर्ति महेश्वर के पास सहस्रधारा में है। वहां से मूर्ति इंदौर लाई गई। मूर्ति की स्थापना के लिए तुकोजीराव ने संकल्प लिया कि मूर्ति को हाथी पर विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा और जहां भी हाथी रुकेगा वहीं मूर्ति स्थापित की जाएगी। हाथी नगर की चौकी के सामने आकर रुक गया। मूर्ति को हाथी से उतारकर चौकी ही स्थापित कर दिया गया और चौकी मंदिर में तब्दील हो गई। देवी की यह मूर्ति 1781 में फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को इस मंदिर में स्थापित की गई थी।
सफेद संगमरमर से बनी इस मूर्ति के चेहरे पर तिल भी हैं, जो किसी के द्वारा नहीं बनाए गए हैं। यहां मां का शृंगार और पूजा मराठी पद्धति से ही होती है। महिषासुर मर्दिनी के साथ मां काली और मां सरस्वती की मूर्ति भी स्थापित है। इसके अलावा मंदिर में तीन शिवलिंग भी स्थापित हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु औरर भगवान शिव के प्रतीक हैं। शिवलिंग के समीप ही मां पार्वती, गणेशजी और हनुमाजी की मूर्ति भी स्थापित है। मंदिर के बाहर भैरवजी का भी मंदिर है।
मंदिर में त्रिदेव स्वरूप तीन शिवलिंग भी हैं। वासंती और शारदीय नवरात्र के अलावा स्थापना दिवस पर यहां विशेष अनुष्ठान होते हैं। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 2017 में हुआ। दोनों नवरात्र की दशमी तिथि पर यहां पूरण की आरती होती है और पूरण पोली का ही भोग भी लगता है। नवरात्र में देवी का दिन में दो बार शृंगार किया जाता है। - पं. उदय एरंडोलकर, मुख्य पुजारी
मैं वर्षों से नियमित रूप से इस मंदिर में आ रहा हूं। यहां आकर बहुत शांति मिलती है और मां हर मनोकामना पूरी करती है। नवरात्र में तो मां का विग्रह और भी आकर्षित लगता है। मां की छवि प्रथमा तिथि पर अलग नजर आती है और नवमी तिथि पर अलग लेकिन जब भी दर्शन करो सारी चिंता दूर हो जाती है। - कुबेर राणे, भक्त