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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chaitra Navratri 2024: सौ बरस का हो रहा तंत्र सिद्धि के लिए पहचाने जाने वाला इंदौर का मरीमाता चौसठ जोगिनी मंदिर

राजकुमार ब्रिज के नीचे स्थित है यह मंदिर। इस मंदिर में तीन देवियों के साथ तंत्र सिद्धि देने वाली चौसठ जोगिनियों के दर्शन होते हैं।

By ramkrashna MuleEdited By: Hemraj Yadav
Publish Date: Sat, 13 Apr 2024 04:05:00 AM (IST)Updated Date: Sat, 13 Apr 2024 07:44:00 AM (IST)
Chaitra Navratri 2024: सौ बरस का हो रहा तंत्र सिद्धि के लिए पहचाने जाने वाला इंदौर का मरीमाता चौसठ जोगिनी मंदिर

Chaitra Navratri 2024: नईदुनिया प्रतिनिधि. इंदौर। शहर के श्रमिक क्षेत्र के राजकुमार ब्रिज के नीचे स्थित मरीमाता चौसठ जोगिनी मंदिर 100 वर्ष का हो रहा है। 100 वर्ष का होने का उल्लास चैत्र नवरात्र में मंदिर परिसर में नजर आ रहा है। यहां इस खास अवसर की तैयारियां चल रही है। इस मंदिर में तीन देवियों के साथ तंत्र सिद्धि देने वाली चौसठ जोगिनियों के दर्शन होते हैं। इस मंदिर में दोनों प्रकट नवरात्र के साथ ही माघ और आषाढ माह की नवरात्र में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का मेला लगता है। इस दौरान यहां प्रतिदिन महापूजन किया जाता है।

इतिहास - चबूतरे पर विराजमान थी माता

मंदिर का इतिहास सौ वर्ष पुराना है। मंदिर का निर्माण पुजारी बाबूराव आवाले बाबा ने 1924 में किया था। इससे पहले भी चबूतरे पर माता विराजमान थी। वर्तमान में मंदिर की देखरेख पुजारी परिवार की पांचवीं पीढ़ी कर रही है। व्यवस्थाओं का संचालन मरीमाता चौसठ जोगिनी भक्त मंडल द्वारा किया जा रहा है। यहां शिव परिवार, पवनपुत्र हनुमान, रिद्धि-सिद्धि संग भगवान गणेश, भैरव बाबा और मोतीबाबा के मंदिर भी हैं। भगवान शिव के बिल्वेश्वर महादेव और बड़केश्वर महादेव के रूप में दो स्वरूप विराजित है।


पालकी यात्रा, छप्पन भोग और भंडारा

मंदिर की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर 19 अप्रैल को विभिन्न कार्यक्रम होंगे। इसमें सुबह 7.30 बजे महाआरती होगी। इसके बाद पालकी यात्रा शाम 4.30 बजे निकलेगी जो क्षेत्र का भ्रमण करेगी। इस अवसर पर माताजी को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। रात 8 बजे से भंडारा होगा। मंदिर में रविवार, मंगलवार और शुक्रवार के अतिरिक्त पूर्णिमा और अमावस्या के दिन भक्त बड़ी संख्या में आते हैं। आषाढ़ मास में विभिन्न समाजों के लोग आकर माता को ध्वजा अर्पित करते हैं। तीज-त्योहारों पर माता का विशेष शृंगार किया जाता है।

मां काली का अवतारी अंश

चौसठ जोगिनी का संबंध मुख्यत: काली कुल से है। यह काली के भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं। इनके माध्यम से भक्त तंत्र और योग सिद्धि प्राप्त करते हैं। यह अलौकिक शक्तियों को देने वाली है। इनके साथना से भक्त की हर तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। - राजेंद्र आवाले पुजारी

मनोकामना सिद्धि के लिए आते हैं भक्त

शक्ति की उपासकों के लिए यह माता का जागरत आराधना स्थल है। यहां वर्षभर लोग अपनी मनोकामना सिद्धि के लिए आते हैं। मंदिर के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर कई कार्यक्रम मंदिर परिसर में आयोजित किए जाएंगे। इसकी तैयारियां भक्त मंडल द्वारा की जा रही है। - रमेश शिंदे, भक्त