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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 15, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chaitra Navratri 2024: इंदौर के खजराना में नरमुंड की माला पहने मां काली के नौ फीट ऊंचे विराट स्वरूप के दर्शन

देश-विदेश में प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से एक किलोमीटर आगे हैं मां कालिका मंदिर। नवरात्र में लगती है भक्तों की भीड़।

By ramkrashna MuleEdited By: Hemraj Yadav
Publish Date: Mon, 15 Apr 2024 03:45:00 AM (IST)Updated Date: Mon, 15 Apr 2024 03:45:38 AM (IST)
Chaitra Navratri 2024: इंदौर के खजराना में नरमुंड की माला पहने मां काली के नौ फीट ऊंचे विराट स्वरूप के दर्शन

Chaitra Navratri 2024: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के खजराना स्थित काली माता मंदिर अहिल्या की नगरी के रहवासियों के बीच आस्था का केंद्र है। यहां पर मां काली का नौ फीट ऊंचा स्वरूप विराजित है। चार भुजाधारी मूर्ति के गले में नरमुंड की माला है। यहां चैत्र और शारदीय नवरात्र के साथ माघ और आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्र में भक्तों का मेला लगता है। इस दौरान मां का 101 लीटर दूध से प्रतीकात्मक अभिषेक कर इसका वितरण प्रसाद के रूप में आसपास की गरीब बस्तियों में किया जाता है।

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इतिहास : फैक्ट्री बेचकर बनवाया था मंदिर

देश-विदेश में ख्यात खजराना गणेश मंदिर के पास स्थित इस मंदिर ने आकार लेना वर्ष 1976 से शुरू किया था। उस समय स्वं राधेश्याम अग्रवाल (बापूजी) ने अपनी चार में तीन फैक्ट्रियां बेचकर मंदिर का निर्माण शुरू किया था। उस समय यहां एक छोटी मूर्ति विराजित थी। इसके बाद मंदिर के पास की भूमि एक भक्त हरिकिशन पाटीदार ने दान स्वरूप दी। जमीन मिलने के बाद 1984 से वहद स्वरूप के मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। इसके बाद 17 फरवरी 1991 में माता की नौ फीट ऊंची मूर्ति विराजित की गई जो जयपुर से आठ किलोमीटर दूर छितोली गांव से लाई गई थी।


हर दिन मनोहारी शृंगार

मंदिर में हर दिन माता का मनोहारी शृंगार होता है। नवरात्र में यहां की जाने वाली आकर्षक विद्युत और पुष्प सज्जा देखते ही बनती है। यहां कतारबद्ध होकर भक्त माता की स्तुति करते नजर आते हैं। इसके साथ ही विभिन्न अवसरों पर माता का विशेष शृंगार किया जाता है। अष्टमी-नवमी को दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारे लगती हैं। परिसर में अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं। इसमें भगवान शिव का पारे का शिवलिंग भक्तों में विशेष आस्था का केंद्र है।

कुछ ही स्थानों पर होते हैं विराट स्वरूप के दर्शन

यहां माता की प्राण-प्रतिष्ठा देशभर से आए विद्वानों की मौजूदगी में की गई थी। वर्तमान में यहां सत्संग सभागृह के साथ अन्य कई सेवा योजना को आकार दिया जा रहा है। माता के इतने विराट स्वरूप के दर्शन देश में कुछ ही स्थानों पर होते हैं। काली माता की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यहां पारदेश्वर महादेव की प्रतिष्ठा की गई। - गुलशन अग्रवाल, पुजारी

सुख, शांति और शक्ति देने वाली

मां कालिका की उपासना जीवन में सुख, शांति और शक्ति के साथ विद्या देने वाली है। मां काली की भक्ति का प्रभाव व्यावहारिक जीवन में मानसिक, शारीरिक और सांसारिक बुराइयों के अंत के रूप में दिखाई देता है। यह मैंने अनुभव किया है। इससे जीवन में आए तनाव और भय का भी अंत होता है। - भक्त रामचंद्र वर्मा