Chat GPT: चैट जीपीटी रोजगार के लिए खतरा नहीं, अवसर है
Chat GPT: दूसरी तकनीकों की तरह इस तकनीक के साथ भी कुछ खतरे जुड़े हुए हैं।
By Sameer Deshpande
Edited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 12 Apr 2023 01:51:17 PM (IST)
Updated Date: Wed, 12 Apr 2023 01:51:17 PM (IST)

Chat GPT इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर भगवान राम की एक तस्वीर बहुत प्रसारित हो रही है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस (एआइ) तकनीक द्वारा वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में श्रीराम के बारे में दिए गए तथ्यों के आधार पर बनाई गई है। ऐसी ही अनेक बातें हैं जो एआइ के माध्यम से करना संभव हो पाया है। लोग एआइ और चैट जीपीटी से डरे हुए हैं कि ये तकनीकें रोजगार के लिए खतरा हैं जबकि इसका दूसरा पहलू यह है कि ये खतरा नहीं बल्कि एक अवसर हैं। यह बात समाजसेवी और लेखक राजकुमार जैन से एक संगोष्ठी में कही।
जैन इंजीनियर्स सोसायटी इंदौर चैप्टर द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और चैट जीपीटी पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में राजकुमार जैन ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस मानव जीवन के प्रत्येक पहलू को व्यापक रूप से प्रभावित कर रही है और जीवन को अधिक आरामदायक और आनंददायक बनाने में सहायता कर रही है। उबाऊ और थकाऊ काम या मानव जीवन के लिए खतरनाक काम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस मशीनों द्वारा किए जा सकते हैं। मशीन लर्निंग द्वारा कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी पर विजय पाना संभव हो रहा है और नई जीवनरक्षक दवाइयों की खोज और निर्माण आसान हो गया है।
हर जिज्ञासा का समाधान
जैन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और चैट जीपीटी के कारण एक तरफ मानव श्रमिकों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है तो दूसरी तरफ संभावनाओं के नए द्वार भी खुल रहे हैं जो नवीन रोजगारों का सृजन करेंगे। जैसे पुरातनकाल में गांव में एक पत्र लेखक होता था जो अनपढ़ और निरक्षर लोगों को उनके पत्र पढ़कर सुनाता था और उनके लिए उनके बताए अनुसार जवाब भी लिखा करता था।
वो कुछ समय बाद आपके लिए जवाब लिखने के अपने अनुभव के आधार पर आपके बिना बताए भी आपके पत्र का जवाब बना देने में सक्षम हो जाता था। उसी तरह चैट जीपीटी अपने 500 बिलियन से भी अधिक पूर्वानुभवों के आधार पर आपके लिए नए लेख लिख सकता सकता है। नित नवीन अनुभवों से सीखते हुए एक लाल बुझक्कड़ की तरह किसी भी विषय पर आपकी जिज्ञासा का समाधान कर सकता है।
गलत उपयोग रोकने वैश्विक नीति जरूरी
जैन ने आगाह किया कि दूसरी तकनीकों की तरह इस तकनीक के साथ भी कुछ खतरे जुड़े हुए हैं, गलत हाथों में पड़ने पर यह तकनीक मानव समुदाय के लिए घातक भी सिद्ध हो सकती है। इसे रोकने के लिए एक वैश्विक नीति निर्माण की आवश्यकता है। एआइ और जीपीटी एक वरदान है और हमें इसे अभिशाप बनने से रोकना है।
अगले सत्र में घोषित होगी कार्यकारिणी
इसी कड़ी में एसजीएसआइटीएस के इलेक्ट्रानिक्स विभाग प्रमुख और सर्वास फाउंडेशन इंडिया की राष्ट्रीय सह सचिव प्रोफेसर अंजना जैन ने विश्व शांति के लिए "सरवास-फाउंडेशन" द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। जैन धर्म की परंपरा अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत अंजना जैन, मोनिका काला, निकिता जटाले, मीनू कटारिया और संगीता जैन द्वारा मंगलाचरण गाकर की गई।
निवृतमान अध्यक्ष इंजी. राजेश जैन और सचिव इंजी. जितेंद्र काला द्वारा अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया और आगामी कार्यकाल के लिए इंजी. सुनील संघवी का नाम प्रस्तावित किया गया जो अपनी कार्यकारिणी की घोषणा आगामी सत्र में करेंगे। कार्यक्रम का संचालन इंजी. संदीप जटाले ने किया।