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पूरे शहर में दूषित पानी आ रहा है, आखिर नगर निगम कर क्या रहा है, इंदौर हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी

इस पर कोर्ट ने कहा कि नोटिस की कार्रवाई सिर्फ बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सार्वजनिक हित में आवश्यकता हो तो ऐसे संस्थानों और निजी व्...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 09:10:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 09:13:35 PM (IST)
पूरे शहर में दूषित पानी आ रहा है, आखिर नगर निगम कर क्या रहा है, इंदौर हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी
इंदौर हाई कोर्ट।

HighLights

  1. भू-जल दूषित हो रहा है यह बात वर्ष 2018 में सामने आ गई थी।
  2. पानी का दुरुपयोग नहीं रोका तो स्थिति और भयावह हो जाएगी।
  3. हम देखते हैं कि निगम के टैंकर सड़क पर पानी ढोलते हुए जाते हैं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। चिंता की बात है कि पूरे शहर में दूषित पानी आ रहा है। भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। पेड़-पौधे, हरियाली कम हो रही है। शहर का भू-जल दूषित हो रहा है यह बात वर्ष 2018 में सामने आ गई थी, फिर भी कोई काम नहीं हुआ। पानी का दुरुपयोग नहीं रोका तो स्थिति और भयावह हो जाएगी। आखिर निगम कर क्या रहा है। हम देखते हैं कि निगम के टैंकर सड़क पर पानी ढोलते हुए जाते हैं।

यह बात शहर में जल संकट को लेकर प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कही। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने मामले में सुनवाई की।

राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत जनहित याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने गुरुवार को तर्क रखे।

उन्होंने कहा निगम का कहना है कि वर्षा जल संरक्षण के नियमों का पालन नहीं करने वालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, पांच हजार रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा रहा है, लेकिन जल संकट की गंभीरता और व्यापकता देखते हुए जुर्माने की राशि अत्यंत कम है।


निगम को दंडात्मक प्रविधानों पर पुनर्विचार कर उन्हें प्रभावी और कठोर बनाना होगा ताकि वर्षा जल संचयन नियमों का वास्तविक रुप से पालन हो सके।

इस पर कोर्ट ने कहा कि नोटिस की कार्रवाई सिर्फ बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सार्वजनिक हित में आवश्यकता हो तो ऐसे संस्थानों और निजी व्यक्तियों को भी नोटिस जारी किए जाना चाहिए जो उलंघन कर रहे हैं, भले ही उनका क्षेत्रफल वर्तमान सीमा से कम हो।

लीकेज कंट्रोल के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं

  • बागडिया ने कहा कि केग की रिपोर्ट बताती है कि पाइप लाइन लीकेज के कारण लगभग 65 प्रतिशत उपचारित पानी की हानि दर्ज होती है। हमें लीकेज कंट्रोल के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।
  • आपातकालीन लीकेज-रिपेयर स्क्वाड का गठन और प्रमुख पाइप लाइन लीकेज, वाल्व लीकेज, अवैध कनेक्शन, प्रेशर-लास पाइंट, और क्रास-कंटेमिनेशन पाइंट की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाए जाना चाहिए।
  • इस पर कोर्ट ने कहा कि निगम शहर के सर्वाधिक जल संकटग्रस्त क्षेत्रों की पहचान करे और ऐसे प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करे। प्रकरण की अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी।

एक हजार कर्मचारी लगाए हैं, नोटिस भी जारी कर रहे हैं

  • इधर निगम ने याचिका में जवाब दे दिया है। उसका कहना है कि जलसंकट से निपटने के लिए एक हजार कर्मचारियों की तैनाती की गई है। रेसिडेंसी क्लब सहित कई संस्थानों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
  • शहर के तालाबों की 24 जल चैनलों में से 11 का काम पूरा हो गया है।
  • आठ चैनलों पर काम चल रहा है। पुराने जल चैनलों को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी चल रहा है।
  • सीएसआर के माध्यम से 288 वाटर शाफ्ट तैयार की हैं। उपचारित पानी का उपयोग निर्माण कार्य, बगीचे, सड़कों और फुटपाथों की धुलाई तथा अन्य गैर-पेयजल उपयोगों में किया जा रहा है।

याचिका में ये हैं मुद्दे

जनहित याचिका में गिरते भूजल स्तर, झीलों और तालाबों के सूखने, पारंपरिक फीडर चैनलों और मोहरियों के अवरोध, वर्षा जल संचयन के प्रभावी क्रियांवयन, पाइप लाइन लीकेज, सीवेज प्रदूषण, उपचारित वेस्ट पानी के पुनर्उपयोग, बंद बोरवेल, रिचार्ज संरचनाएं, जलाशय पुनर्जीवन और जल सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।