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फर्जी दस्तावेज पेश किए तो सिविल कोर्ट दे सकता है एफआईआर के आदेश, फर्जी वसीयत के मामले में हाईकोर्ट ने कानून को किया स्पष्ट

सिविल मामलों की सुनवाई के दौरान फर्जी दस्तावेज या गंभीर जालसाजी सामने आने पर सिविल कोर्ट, पुलिस को एफआइआर दर्ज कर जांच के आदेश दे सकते हैं। इसके लिए अ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 05:04:16 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 05:04:16 PM (IST)
फर्जी दस्तावेज पेश किए तो सिविल कोर्ट दे सकता है एफआईआर के आदेश, फर्जी वसीयत के मामले में हाईकोर्ट ने कानून को किया स्पष्ट
कोर्ट ने सुनाया फैसला। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. अलग से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य नहीं है
  2. भाइयों ने दावा किया कि उनके पिता ने एक भाई के पक्ष में वसीयत की थी
  3. वसीयत मुकदमा दायर होने के बाद कूटरचित तरीके से तैयार की गई थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : सिविल मामलों की सुनवाई के दौरान फर्जी दस्तावेज या गंभीर जालसाजी सामने आने पर सिविल कोर्ट, पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दे सकते हैं। इसके लिए अलग से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य नहीं है।

मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला फर्जी वसीयत के मामले में दर्ज एफआईआर निरस्त करने से इंकार करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने और धोखाधड़ी को सामने लाने के लिए सिविल कोर्ट के पास शक्तियां हैं। गंभीर जालसाजी के मामलों में केवल तकनीकी आपत्ति के आधार पर पुलिस जांच को रोका नहीं जा सकता।


जमीन के मालिकाना हक को लेकर वाद प्रस्तुत किया था

मामला कृषि भूमि से जुड़ा हुआ है। जमीन के मालिकाना हक को लेकर दो बहनों ने दो भाइयों के विरुद्ध सिविल न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान भाइयों ने दावा किया कि उनके पिता ने फरवरी 2019 को एक भाई के पक्ष में वसीयत की थी। उन्होंने कोर्ट में वसीयत भी पेश की। इसमें शिवराजसिंह तथा धर्मेंद्रसिंह नामक दो गवाह थे।

वसीयत मुकदमा दायर होने के बाद कूटरचित तरीके से तैयार की गई थी

सिविल कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए यह पाया कि वसीयत मुकदमा दायर होने के बाद कूटरचित तरीके से तैयार की गई थी। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने आरोपितों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के पालन में पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया।

इसी एफआईआर को निरस्त करने की मांग करते हुए दोनों भाइयों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि सिविल कोर्ट को पुलिस को सीधे एफआईआर के आदेश देने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्वयं लिखित शिकायत करना थी।

कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी

कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए लिखा कि अगर कूटरचना कोर्ट के बाहर हुई है तो पुलिस द्वारा सीधे मामला दर्ज कर जांच करने पर कानूनी रोक नहीं है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सिविल कोर्ट को हर परिस्थिति में पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने का स्पष्ट प्रावधान भले नहीं हो, लेकिन न्याय के हित में धारा 151 के तहत निहित शक्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। अदालत ने माना कि कूटरचना और धोखाधड़ी जैसे गंभीर कृत्यों की जांच को केवल तकनीकी आपत्ति के आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने पुलिस द्वारा दर्ज एफआइआर को वैध मानते हुए याचिका निरस्त कर दी।

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