
इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में ‘अपराध बिकता है’ विषय पर संजीव पालीवाल और मनोज राजन त्रिपाठी का सत्र हुआ। यह सत्र नईदुनिया द्वारा प्रस्तुत किया गया। दोनों वक्ताओं ने इंदौर स्वच्छ शहर होने पर तारीफ की और शहरवासियों को बधाई दी।
मनोज राजन त्रिपाठी ने कहा कि यह बात सही है कि अपराध बिकता है और जब तक बिकता रहेगा जब तक आप उसे खरीदते रहेंगे। अगर तुलसीदास की रामायण पढ़ें तो रावण अपराधी था वहीं महाभारत में दुर्योधन, मदर इंडिया में लाला यानी कन्हैयालाल भी अपराधी था। अपराध अगर कुछ नहीं है तो वो कामेडी है। अपराध हर जगह है और हर तरह का अपराध है।
संजीव पालीवाल ने कहा कि मैं ज्ञान के लिए अपराध नहीं लिखता। मनोरंजन के लिए लिखता हूं। वादा करता हूं कि आपको मेरी किताब में फिल्म का आनंद आएगा। हर पत्रकार की जिंदगी में उसके करियर में कहानियां और चरित्र होना चाहिए। अगर किसी पत्रकार के पास कैरेक्टर नहीं है तो वो पत्रकार नहीं है। मैंने अपने 30 वर्ष के पत्रकारिता करियर में कई चरित एकत्र किए।
उनसे सवाल पूछा गया कि क्या पत्रकारिता में भी अपराध होते हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में ऐसी कोई गंभीर अपराध नहीं हुआ है। ऐसा कहना सही नहीं है कि पत्रकारिता में भी अपराध होते हैं। दोनों वक्ताओं से सोनाली नरगुंदे और गरिमा मुद्गगल ने चर्चा की।
हिंदी ही मेरी पहचान बन गई...
‘स्टोरीबाजी‘ नाम से हुए सत्र में दिव्य प्रकाश दुबे ने कहा कि मैं लेखक कैसे बन गया है इसका कोई निश्चित कारण नहीं है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे लेखक ही बनना है। मैं अकसर चीजों से बोर हो जाता हूं। 90 के दोर में घर पर किताबों और कैसेट का काफी कलेक्शन रहता था। तब समाज में हिंदी और अंग्रेजी भाषा में भी बहुत अंतर माना जाता था। अंग्रेजी सीखने के लिए मैंने बहुत मेहनत की लेकिन बाद में पता लगा कि मेरा मकसद अंग्रेजी नहीं बल्कि हिंदी पर ही पकड़ बनाकर चलना था।बाद में हिंदी ही मेरी पहचान बन गई।
कविता कुंभ में पंकज राग, प्रो. आशुतोष दुबे, उत्पल बेनर्जी, राजीव कुमार और प्रशांत चौबे ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया। इसमें कई कविताओं पर खूब तालियां बजी। घर की जोगी सिद्द कार्यक्रम में शिखा शर्मा, अनमोल ठाकुर, राहुल भोसले ने प्रस्तुति दी। शाम को नीरज आर्य का कबीर कैफे बैंड की टीम ने प्रस्तुति दी। इसमें बड़ी संख्या में शहरवासी पहुंचे। खासकर युवाओं के बीच बैंड काफी प्रसिद्द है और अलग तरीके से बैंड की प्रस्तुति होने से काफी पसंद किया जाता है।
बड़ी संख्या में आ रहे हैं युवा लेखक
फेस्टिवल में आने से साहित्य की दुनिया से परिचित होने का मौका मिला। पहली बार इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मुझे भी अहसास हुआ कि कहीं न कहीं मेरी रुचि साहित्य की ओर रही है। अब इसके लिए भी समय निकालने की कोशिश रहेगी।
- हिमांशी शर्मा, बीबीए छात्रा
कविताएं और कई कहानियां पढ़ते रहते हैं। उसे लिखने के पीछे की कला पर जाते हैं तो पता लगता है कि इसके लिए साहित्य का ज्ञान जितना अच्छा होगा उतना अच्छा लिख सकते हैं। कुछ लिखने की इच्छा है। ऐसे में नामी रचनाकारों को सुनने से कई बारिकियां पता लगी।
- अदिश्री यादव, ला छात्रा