इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले की अधिकांश गोशालाओं में गोवंश के लिए पशु आहार, चारे-भूसे का संकट गहराता जा रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कहीं-भी भूसा आसानी से उपलब्ध नहीं है और जहां कहीं थोड़ा बहुत मिल भी रहा है तो गत वर्ष के मुकाबले दो गुने दामों पर। हर वर्ष भूंसे की कीमत 3.50 से ले कर चार रुपये प्रति किलो तक रहती है लेकिन इस बार वर्तमान में भाव सात से आठ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। अधिकांश गोशालाओं में भूसे का स्टाक खत्म होने को है।
इस बार गेहूं कटाई के सीजन में बारिश हो जाने से अधिकांश किसानों ने अपनी तैयार फसल को हार्वेस्टर की मदद से कटवाया है। इस कारण भूसे की कमी हो गई हैं। इसके अलावा अनेक व्हाइट कोल निर्माताओं ने भी किसानों से सीधे-सीधे भूसा खरीद लिया है। व्हाइट कोल का उपयोग होटलों और अन्य कारखानों आदि में ईंधन के रूप में किया जाता है और चूंकि इसके प्रयोग से ज्यादा धुंआ नहीं होता है इसलिए अधिकांश शहरी उपभोक्ता व्हाइट कोल के ग्राहक बनते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि अब दो गुने भावों में भी भूसा नहीं मिल पा रहा है। जिले की अधिकांश गोशालाओं में भूसे का स्टाक एकाध सप्ताह का ही बचा रह गया है। मां पराम्बा गो भक्त मंडल के संयोजक योगेश होलानी, अमोल जिंदानी एवं मुकेश गुप्ता ने बताया कि पशु आहार की समस्या आने वाले दिनों में विकराल रूप ले सकती है। इस स्थिति में गो भक्तों ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे अपनी विधायक निधि अथवा अन्य किसी कोष से आर्थिक सहायता दे कर गोवंश के लिए आहार की व्यवस्था सुनिश्चित कराने में सहयोग प्रदान करें।
जिले की नौ गोशाला में 24 घंटे पानी
मां पराम्बा गो भक्त मंडल ने अपने स्तर पर कुछ समाजसेवी संस्थाओं एवं व्यक्तियों से संपर्क कर कुछ गोशालाओं के लिए भूसे की व्यवस्था की है। इनमें माहेश्वरी कपल क्लब, मोहिनीदेवी मदनलाल समदानी पारमार्थिक ट्रस्ट मुम्बई, जिंदाखेड़ा के पंकज दुबे, समाजसेवी मुकेश अग्रवाल, वासुदेव मालू, गोपाल राठी, मनोज चंडक, रवि पांडे, मनीष गुप्ता आदि ने गोशालाओं की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के सदस्य हुकमचंद सावला के मार्गदर्शन में मंडल के प्रयासों से जिले की खजूरिया, सिकंदरी, हातोद, गांधीनगर, गंगाजलखेड़ी, देवड़ाखेड़ी, कनवासा, देपालपुर एवं गौतमपुरा की गोशालों में 24 घंटे पानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। भक्त मंडल ने इस वर्ष के अंत तक 50 गोशालाओं की स्थापना का लक्ष्य रखा है।