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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने पिछले सप्ताह बीएड प्रथम सेमेस्टर का रिजल्ट निकाला। मंगलवार को विद्यार्थियों के अलग-अलग समूह ने खराब रिजल्ट को लेकर हंगामा किया और भारी नाराजगी जताई। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय के नालंदा परिसर पहुंचे और जमकर नारेबाजी की गई।
छात्रों ने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया है, जिसके कारण विद्यार्थियों को एक ही विषय में फेल कर दिया गया। विश्वविद्यालय ने पिछले शुक्रवार देर रात बीएड प्रथम सेमेस्टर का परिणाम घोषित किया था।
49 कॉलेजों के 7209 विद्यार्थियों ने दिसंबर में परीक्षा दी। घोषित परिणाम के मुताबिक करीब 42 प्रतिशत यानी लगभग 3300 विद्यार्थी ही पास हो सके हैं।
वहीं 549 छात्र-छात्राएं दो से अधिक विषयों में फेल हो गए। जबकि लगभग 3000 विद्यार्थियों को एक-एक विषय में एटीकेटी मिली है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पांच कालेज ऐसे हैं, जहां पास होने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत पांच से भी कम रहा है।
खराब परिणाम के कारण नाराज कुछ कालेज संचालक भी कुलगुरु डा राकेश सिंघई से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उनके साथ चर्चा ठीक से नहीं हो सकी।
पिछले दो दिनों से कई विद्यार्थी भी अलग-अलग विषयों में कम अंक मिलने की शिकायत लेकर विश्वविद्यालय पहुंच रहे थे। मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे सबसे पहले धार और झाबुआ क्षेत्र के कालेजों में पढ़ने वाले छात्र विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने बीएड प्रथम सेमेस्टर की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग की।
छात्रों का कहना था कि यदि कापियों की सैंपलिंग करवाई जाए तो मूल्यांकन में हुई गड़बड़ी सामने आ सकती है। विद्यार्थियों की मांग पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभिन्न कालेजों के ऐसे 10 विद्यार्थियों की सूची मांगी है, जिनकी उत्तर पुस्तिकाएं विशेषज्ञों से दोबारा जांचवाई जाएंगी। इस सूची में विद्यार्थियों का नाम, अनुक्रमांक और संबंधित विषय का विवरण देना होगा।
छात्रों ने दो दिन के भीतर सूची देने की बात कही है। उनका कहना है कि पुनर्मूल्यांकन होने से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। पहले समूह के प्रदर्शन के लगभग आधे घंटे बाद विद्यार्थियों का एक और समूह विश्वविद्यालय पहुंचा और उन्होंने भी परिणाम को लेकर विरोध जताया।
इस समूह ने कुछ छात्र-छात्राओं के रोल नंबर और रिजल्ट की सूची प्रशासन को सौंपी। इस दौरान कुलसचिव प्रज्वल खरे, छात्र कल्याण संघ के अध्यक्ष डा एलके त्रिपाठी, परीक्षा नियंत्रक डॉ अशेष तिवारी और सहायक कुलसचिव डॉ. विष्णु मिश्रा ने विद्यार्थियों से चर्चा की गई। उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। परीक्षा नियंत्रक डा. तिवारी ने कहा कि 42 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए हैं, इसलिए परिणाम पूरी तरह खराब नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पहले ही दो बार करवाई जा चुकी है। फिर भी विद्यार्थियों की शिकायतों को देखते हुए विशेषज्ञों से दोबारा जांच करवाई जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रिव्यू के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि भी बढ़ा दी गई है, ताकि सभी छात्र-छात्राएं आसानी से आवेदन कर सकें।