
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : जल संकट का असर अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय पर भी दिखाई देने लगा है। गर्मियों में पानी की किल्लत से निपटने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक्शन प्लान बनाया है। तक्षशिला परिसर स्थित अध्ययनशालाओं में शैक्षणिक गतिविधियों में बदलाव किया गया है।
इसके अंतर्गत दिसंबर और अप्रैल में होने वाली सेमेस्टर परीक्षाएं 20 दिन पहले कराई जाएंगी। विश्वविद्यालय ने विभागों को 30 मार्च तक परीक्षा संपन्न करवाई जाएगी। वहीं गर्मियों की छुट्टियों में विद्यार्थियों को हास्टल खाली करना होगा। प्रशासन के मुताबिक मार्च से पहले ही विद्यार्थियों का सिलेबस पूरा कर लिया जाए। ताकि गर्मियों में पानी की मांग कम रखी जा सके।
आमतौर पर विश्वविद्यालय के अध्ययनशालाओं में दिसंबर में पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें सेमेस्टर की परीक्षाएं होती है, जो इस साल 15 नवंबर से रखने पर विचार किया गया है। इसे लेकर अध्ययनशालाओं को निर्देश दिए गए हैं। परीक्षाओं के बाद मिलने वाले सेमेस्टर ब्रेक की छुट्टियों में भी कटौती की जाएगी।
अगले सेमेस्टर की कक्षाएं जल्द शुरू होंगी, जिससे पढ़ाई का नुकसान न हो और निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा किया जा सके। वहीं दूसरे, चौथे, छठे और आठवें सेमेस्टर की अप्रैल-मई में होने वाली परीक्षाएं भी 30 मार्च तक संपन्न की जाएगी।
समय से पहले सिलेबस पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के 28 विभागों में अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को निर्धारित समय में पढ़ाई पूरी करने और परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सकेंगा। कुलसचिव प्रज्वल खरे का कहना है कि मार्च के बाद ही पानी की अधिक आवश्यकता पड़ेगी। इसे लेकर 30 मार्च तक विभागों को सभी परीक्षाएं खत्म करने के निर्देश दिए है।
विश्वविद्यालय के नालंदा-तक्षशिला और आइइटी परिसर में 16 बोरिंग है। इनके माध्यम से पूरे विश्वविद्यालय में जल प्रदाय होता है, लेकिन कम वर्षा होने से विश्वविद्यालय में जल संकट की स्थिति बनने लगी है। 16 में दो बोरिंग सूखे गए है। जबकि छह बोरिंग का जलस्तर नीचे पहुंच चुका है।
अब होस्टल में पानी की किल्लत होने लगी है। आइईटी के पांच बोरिंग है, जिनमें पानी का स्तर बना हुआ है। जबकि छह तक्षशिला, दो नालंदा और तीन आवासीय परिसर में बने है। इनमें पानी का स्तर नीचे पहुंच चुका है। इस वजह से दो से तीन बार में पानी की टंकी भरी है। ऐसे में गर्मियों के दौरान बोरिंग से पर्याप्त पानी मिलना मुश्किल हो सकता है। इसी आशंका को देखते हुए प्रशासन ने गर्मियों की छुट्टियों में विद्यार्थियों को हास्टल में रहने की अनुमति नहीं दी है।
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