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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इंदौर में सबसे ज्यादा सिग्नल तोड़ते हैं Delivery Boy... HC ने कहा- जहां चालान बने, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों पर एक्शन हो

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर की यातायात व्यवस्था पर सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन डिलीवरी वाले सबसे ज्यादा सिग्नल तोड़ते हैं और उनके पुलिस सत्यापन की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा, ग्रीन बेल्ट और फुटपाथ पर धार्मिक स्थलों के निर्माण पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई।

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 23 Jul 2025 10:09:52 AM (IST)Updated Date: Wed, 23 Jul 2025 10:58:59 AM (IST)
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इंदौर में सबसे ज्यादा सिग्नल तोड़ते हैं Delivery Boy... HC ने कहा- जहां चालान बने, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों पर एक्शन हो
कोर्ट ने कहा कि जिस भी चौराहे पर चालान बन रहे हैं, इसका मतलब यह है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मी ध्यान नहीं दे रहे, उन पर कार्रवाई की जाए। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. शहर में 80 फीट चौड़ी सड़क पर भी चलना मुश्किल है।
  2. दो मिनट बचाने रेड लाइट जंप करते हैं डिलीवरी वाले।
  3. ई-रिक्शा की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई बिंदुओं पर बात की। ऑनलाइन खाने-पीने का सामान सप्लाय करने वालों को लेकर कहा कि सबसे ज्यादा रेड सिग्नल जंप डिलीवरी वाले ही करते हैं। दो मिनट बचाने रेड लाइट जंप करते हैं और कुछ नहीं होता। ये हमारे घरों तक पहुंच रखते हैं, लेकिन इनके पुलिस सत्यापन की व्यवस्था नहीं है। कभी इनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं जांचा। इस बारे में नीति बनानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन बेल्ट, उद्यान और फुटपाथ पर धड़ल्ले से धार्मिक स्थल बन रहे हैं, लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है।

ये धार्मिक स्थल यातायात को बाधित कर रहे हैं। यह किसी एक क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे शहर की समस्या है। इसका स्थायी समाधान जरूरी है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर धार्मिक गतिविधियों के नाम पर कब्जा हो रहा है। हालत यह हो जाती है कि 80 फीट चौड़ी सड़क पर भी चलना मुश्किल है।


ई-रिक्शा को लेकर कोई योजना नहीं

कोर्ट ने ई-रिक्शा की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। कहा कि इस बारे में सख्ती से कार्रवाई जरूरी है। पुलिस ई-रिक्शा चालकों के पुलिस सत्यापन, ट्रेनिंग इत्यादि की व्यवस्था करे। ई-रिक्शा के चालकों की कोई सूची नहीं है। कभी उनका आपराधिक रिकार्ड नहीं जांचा जाता। इस संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहिए।

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यह कहा याचिकाकर्ता ने

याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि

  • चौराहों पर लगे सिग्नल 24 घंटे चालू रखे जाएं।
  • पुलिसकर्मी चौराहों पर यातायात नियंत्रित करने के बजाय मोबाइल चलाते हैं। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
  • वीआईपी मूवमेंट के दौरान सिग्नल ग्रीन रखे जाएं।
  • सड़कों पर गड्ढों की समस्या का स्थायी समाधान हो।

कोर्ट ने कहा कि

  • जो रेड लाइट जंप करते हैं, उन्हें वहीं दो घंटे रोकें।
  • जिस चौराहे पर चालान बन रहे हैं, वहां तैनात पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
  • बीमा रिन्यू करने वाली कंपनी पहले बकाया चालान जमा कराए। इसके बाद बीमा रिन्यू किया जाए।
  • कार पुलिंग को बढ़ावा दें। शुरुआत हाई कोर्ट से हो सकती है। एक ऑफिस से जुड़े वकील एक कार से कोर्ट आएं तो सड़क पर वाहन संख्या कम करने में मदद होगी।

शासन ने पेश किया बिंदुवार जवाब

कोर्ट ने शासन से मामले में बिंदुवार जानकारी मांगी थी। मंगलवार को शासन और नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट भुवन गौतम ने कोर्ट के समक्ष बिंदुवार जवाब पेश किया।

प्रश्न - क्या प्रत्येक प्रमुख चौराहे पर यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

उत्तर - शहर के 121 चौराहों और प्रमुख चौराहों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इन चौराहों पर 467 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

प्रश्न - शहर में कितने ब्लैक स्पाट चिह्नित किए गए हैं।

उत्तर - इंदौर शहर में 16 ब्लैक स्पाट हैं।

प्रश्न - दोपहिया वाहन चालक को हेलमेट न पहनने और लाल बत्ती तोड़ने के लिए कितने चालान जारी किए गए हैं।

उत्तर - बिना हेलमेट और दोपहिया वाहनों पर तीन सवारियों के चालान को दर्शाने वाला चार्ट इस प्रकार है

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  • आईटीएमएस साफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी और कानूनी कार्रवाई के लिए सैकड़ों स्थानों पर हाईडेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं।
  • पिछले दो वर्ष में यातायात पुलिस द्वारा 12 लाख से अधिक ई-चालान किए गए हैं।
  • यातायात नियमन के तीनों घटकों - यातायात इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
  • सरकार ने राहवीर योजना शुरू की है। इसके तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाले व्यक्ति को उचित पुरस्कार दिया जाता है।
  • किसी भी समय समस्या पर प्रतिक्रिया देने और उसका समाधान करने के लिए 40 से अधिक त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) बनाए गए हैं।

प्रश्न - प्रमुख चौराहों पर कितनी ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं और काम कर रही हैं।

उत्तर - विभिन्न चौराहों पर कुल 85 ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं। इनमें सभी प्रमुख चौराहे शामिल हैं।

प्रश्न - सड़क चौड़ीकरण के तहत कितने बाएं मोड़ बनाए गए हैं।

उत्तर- शहर के 24 प्रमुख चौराहों पर सड़क चौड़ीकरण के तहत कुल 96 बाएं मोड़ बनाए जा चुके हैं।

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प्रश्न - मुख्य और साइड लेन सड़कों पर सड़क चिह्नांकन किया गया है।

उत्तर- शहर की 27 प्रमुख सड़कों को सड़क चिह्नांकन के लिए चिह्नित किया गया है।

प्रश्न- पिछले पांच वर्ष के दौरान निर्मित स्पीड ब्रेकर, पार्किंग क्षेत्र, पैदल यात्री पुलों की संख्या कितनी है।

उत्तर- विभिन्न सड़कों पर 53 स्पीड ब्रेकर बनवाए हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 14 पार्किंग क्षेत्र विकसित किए हैं। विभिन्न स्थानों पर चार और फुटओवर ब्रिज प्रस्तावित किए हैं।

प्रश्न- उन दुकान मालिकों/दुकानदारों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा रही है, जो दुकानों के सामने सड़क/फुटपाथ पर अपना सामान पार्क करके यातायात के सुचारु प्रवाह में बाधा उत्पन्न करते हैं।

उत्तर- अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध जुर्माना/दंड लगाने के संबंध में निर्णय लिया गया है और उसे अनुमोदन हेतु महापौर परिषद को भेजा गया है।

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