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इंदौर में 70 साल से ज्यादा पुराने पेड़ों को हरित धरोहर घोषित करने की मांग, इनके पास से हटें पेवर ब्लॉक

हुकुमचंद मिल, एमओजी लाइंस, मेट्रो, नया आयुर्वेदिक कॉलेज, न्यू एमवाय अस्पताल, मास्टर प्लान की सड़कें, रानी सराय, नया रेलवे स्टेशन और शास्त्री पुल सहित ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 11:24:45 AM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 11:32:57 AM (IST)
इंदौर में 70 साल से ज्यादा पुराने पेड़ों को हरित धरोहर घोषित करने की मांग, इनके पास से हटें पेवर ब्लॉक
शहर में हरियाली को बचाने की है जरूरत।

HighLights

  1. शहर में पुराने पेड़ों की पहचान कर उनकी जियो-टैगिंग की जाए
  2. इससे इन पेड़ों की जानकारी सरकारी रिकार्ड में सुरक्षित रहेगी
  3. विकास कार्य के दौरान उन्हें बचाने की योजना बनाई जा सकेगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर की पहचान सिर्फ सड़कों, इमारतों और बाजारों से नहीं बल्कि वर्षों पुराने पेड़ों, कुएं-बावड़ियों और तालाबों से भी होती है। तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण के बीच अब इस प्राकृतिक विरासत को बचाने की आवाज उठने लगी है। पर्यावरण प्रेमी मंच ने संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपकर शहर के पुराने पेड़ों और जलस्रोतों के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग की है।

मंच ने 70 से 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने पेड़ों को ‘हरित धरोहर’ घोषित करने पर जोर दिया है। ऐसे पेड़ों की पहचान कर उनकी जियो-टैगिंग की जाए और उनका अलग से ग्रीन हेरिटेज रजिस्टर बनाया जाए। इससे इन पेड़ों की जानकारी सरकारी रिकार्ड में सुरक्षित रहेगी और भविष्य में किसी विकास कार्य के दौरान उन्हें बचाने की योजना पहले से बनाई जा सकेगी।


पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों के आसपास किए गए सीमेंटीकरण और पेवरीकरण को हटाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जब पेड़ों के तने और जड़ों के आसपास पूरी जमीन पक्की कर दी जाती है तो वर्षा का पानी जमीन में नहीं पहुंच पाता। इससे पेड़ कमजोर होते हैं और भूजल रिचार्ज भी प्रभावित होता है। पुराने और अनुपयुक्त ट्री-गार्ड भी हटाए जाने चाहिए ताकि पेड़ों को पर्याप्त जगह और पानी मिल सके।

विकल्प तलाशे जाएं

ज्ञापन में हुकुमचंद मिल, एमओजी लाइंस, मेट्रो, नया आयुर्वेदिक कॉलेज, न्यू एमवाय अस्पताल, मास्टर प्लान की सड़कें, रानी सराय, नया रेलवे स्टेशन और शास्त्री पुल सहित परियोजनाओं में ‘पहले पेड़ बचाएं’ नीति लागू करने की मांग की गई है।

मंच का कहना है कि किसी पेड़ को काटने से पहले डिजाइन या सड़क के अलाइनमेंट में बदलाव सहित सभी विकल्प तलाशे जाएं और कटाई को अंतिम विकल्प रखा जाए। साथ ही शहर के करीब 500 कुएं-बावड़ियों और 20 तालाबों का सीमांकन, जियो-टैगिंग, सफाई और अतिक्रमण हटाकर पुनर्जीवन की मांग की गई है।

पर्यावरण विशेषज्ञों की समिति बनाएं

मंच ने ‘नो नेट लास ऑफ ग्रीन कवर’ का लक्ष्य तय करने और हीट एक्शन प्लान को दीर्घकालीन अर्बन क्लाइमेट एक्शन प्लान से जोड़ने का सुझाव भी दिया। मंच ने संभागायुक्त की अध्यक्षता में संबंधित विभागों और पर्यावरण विशेषज्ञों की समिति बनाकर इन कार्यों की हर छह महीने में प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

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