5 Famous Mandir In Indore इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। देवी अहिल्या की नगरी इंदौर में देवी-देवताओं के कई छोटे-बड़े मंदिर है ।इनमें से भी कुछ खास मंदिर ऐसे है जो शहर की पहचान बने हुए है। ऐसे प्रमुख पांच मंदिर खजराना गणेश मंदिर, बिजासन माता मंदिर, देवगुराड़िया शिव मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर और पितरेश्वर धाम शामिल है। खजराना गणेश मंदिर में भक्तों की मान्यता है कि उल्टी स्वास्तिक बनाने से बंद किस्मत के द्वार खुल जाते हैं तो बिजासन माता मंदिर में सौभाग्य की कामना से नवविवाहित महिलाएं दर्शन के लिए आती हैं। इसी तरह देवगुराड़िया शिव मंदिर की प्राचीनता भक्त को आकर्षित करती हैं तो पितरेश्वर हनुमान की 72 फीट की उंचाई। इसके अलावा रणजीत हनुमान मंदिर में भक्त शत्रु पर विजयी की कामना से दर्शन के लिए आते हैं।
देश-विदेश में भक्त के बीच आस्था का केंद्र खजराना गणेश
खजराना गणेश मंदिर देश-विदेश में भक्तों के बीच आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि मंदिर में आकर उल्टा स्वास्तिक बनाने से भक्त की मनोकामना पूरी होती है। यह स्वास्तिक गणेश मंदिर के पीछे की दीवार पर बनाया जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1735 में होलकर शासक देवी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था। भगवान गणेश के इस मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के 33 मंदिर हैं। देश के धनी मंदिरों में खजराना गणेश मंदिर का नाम भी आता है। तिल चतुर्थी के मेले के दौरान भगवान गणेश का दो करोड़ के स्वर्ण आभूषणों से शृंगार किया जाता है। खजराना गणेश मंदिर के पुजारी अशोक भट्ट कहते हैं कि बुधवार और रविवार को हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। भगवान को मोतीचूर के लड्डूओं का भोग लगाया जाता है।
माता के नौ स्वरूपों के होते बिजासन माता मंदिर में दर्शन
वैष्णोदेवी मंदिर कटरा की तरह शहर के पश्चिम क्षेत्र के बिजासन माता मंदिर में माता के नौ स्वरूप के दर्शन नौ पींडियों के रूप में बिजासन माता मंदिर में होते हैं। मंदिर का इतिहास एक हजार साल से पुराना बताया जाता है।किसी समय क्षेत्र में बड़ी संख्या में काले हिरण पाए जाते थे। मंदिर का निर्माण महाराजा शिवाजीराव होलकर ने 1760 में कराया था। बिजासन माता को सौभाग्यदायिनी माना जाता है। इसके चलते विवाह के बाद दूर-दूर से माता के दर्शन के लिए नवविवाहिता महिलाएं आती है। पुजारी सतीश वन गोस्वामी बताते हैं कि नवरात्र में यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र में भक्तों का मेला लगता है। एक अन्य कथा कहती है कि आल्हा-उदल ने भी मांडू के राजा को हराने से पहले यहां मन्नत मांगी थी।
शिवलिंग के अभिषेक के लिए गोमुख से निकलता जल
शहर की सीमा से लगे होलकरकालीन देवगुराडिया शिव मंदिर शिव भक्तों के बीच आस्था का केंद्र है। यहां शहरी और ग्रामीण भक्त समान संख्या में प्रभु आराधना के लिए आते हैं। यह मंदिर होलकरकालीन मंदिरों में शुमार है। इस स्थान को गरुड तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। 1784 में महेश्वर से इंदौर प्रवास के दौरान देवी अहिल्याबाई होलकर भी यहां दर्शन के लिए आई थी। इस बात का उल्लेख भी मिलता है कि उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। यहां के शिवलिंग को गुटकेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। शिवलिंग के अभिषेक के लिए जल गो-मुख से निकलता है। महंत रितेशपुरी बताते हैं कि मंदिर के द्वार पर की गई कारीगरी 11-12वीं शताब्दी की नजर आती है।तत्कालीन होलकर शासक यहां महाशिवरात्रि पर आते थे।
जीत का आर्शीवाद देते रणजीत हनुमान
रणजीत हनुमान मंदिर शहर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित है। यहां पर हनुमानजी की ढाल और तलवार लिए मूर्ति विराजमान है। मान्यता है कि भगवान भक्तों को जीत का आर्शीवाद देते हैं। एक समय राजा युद्ध में जाने से पहले रणजीत हनुमानजी के दर्शनकर युद्ध में जाते थे। मंदिर में प्रवेश के साथ ही भक्त आपको हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड का पाठ करते नजर आ जाएंगे। यू तो यहां आठ दिन भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन मंगलवार और शनिवार को भक्तों की कतार लगती है। पुजारी दीपेश व्यास बताते हैं कि मंदिर की स्थापना 125 साल पहले हुई थी। रणजीत अष्टमी पर निकलने वाली प्रभातफेरी में एक लाख श्रद्धालु आते हैं। हनुमान जयंती पर जन्म आरती सुबह छह बजे होगी।
पितृ दोष से मुक्त करते पितृ पर्वत पर विराजित पितरेश्वर हनुमान
शहर के सीमा पर पितृ पर्वत पर विराजित पितरेश्वर हनुमान की 108 टन वजनी मूर्ति पवनपुत्र भक्तों के बीच आस्था का केंद्र है। 72 फीट उंची मूर्ति दूर से ही नजर आ जाती है। इस मूर्ति का निर्माण ग्वालियर के 125 कारीगरों ने सात साल में बनाया था। हनुमानजी के चारों ओर पांच हाइमास्ट लगे हुए है। इससे रात में भी दिन जैसा दुधिया उजाला रहता है। मान्यता है कि पितरेश्वर हनुमान के पूजन से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। यहां पर लाइट एंड साउंड शो का आयोजन भी विशेष दिनों में होता है। इसके लिए जर्मन से विशेष दो करोड की लेजर लाइट मंगवाई गई थी। पितरेश्वर धाम के व्यवस्थापक महेश दलोत्रे बताते है कि लेजर लाइट के जरिए हनुमानजी के प्रतिमा के सीने पर सात रंगों में हनुमान चालीसा का चित्रमय वर्णन दिखाई देता है।