
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। महिला अपराध से जुड़े प्रकरणों में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। दुष्कर्म–छेड़छाड़ और पाक्सो एक्ट जैसे मामलों में गलत धारा लगाकर मुलजिम पेश कर दिए गए। गड़बड़ी खुद महिला सुरक्षा के डीजी द्वारा पकड़ी है। उन्होंने 10 प्रकरणों की सूची बनाकर एसपी और डीसीपी से जवाब मांगा है। पुलिस की चूक के कारण सैंकड़ों आरोपित जमानत का लाभ ले चुके हैं।
विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार ने यह गड़बड़ी 1 अगस्त से 31 अगस्त तक दर्ज बलात्कार के प्रकरणों की समीक्षा में पकड़ी। करीब 410 केसों की समीक्षा में 102 मामलों में थाना स्तर पर त्रुटि मिली। डीजी कार्यालय से जारी पत्र में सभी प्रकरणों की सूची बनाकर बताया गया कि किन धाराओं का समावेश किया जाना चाहिए था।
महिला अपराधों को लेकर गंभीर न रहने वाले पर्यवेक्षणकर्ता एसीपी, एडीओपी और सीएसपी से स्पष्टिकरण के साथ प्रतिवेदन भी मांगा गया है। कुमार ने पत्र में लिखा कि उक्त प्रकरणों की समीक्षा करें और समुचित धाराओं का समावेश भी करें।
डीजी ने पूर्व में भी एसपी स्तर के अफसरों को पत्र लिखकर चेताया था। दोबारा गलती करने पर जवाब मांगा और कहा कि थाना प्रभारी, अनुविभागीय अधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रतिदिन डीएसआर का न अवलोकन किया गया न विशेष ध्यान दिया गया। जांच से वरिष्ठ अफसरों का दैनिक कार्यों पर प्रभावी पर्यवेक्षण का अभाव साबित हुआ है।
महिला अपराध एक्सपर्ट ने इन थानों में पकड़ा घोटाला
थाना कनाड़िया
केस क्रमांक 485/23 में 65(1) 64(2)(के) बीएनएस और पाक्सो एक्ट की धारा 5/6 लगाई थी। जबकि मानसिक विक्षिप्त होने के कारण पुलिस को धारा 5(के) 6 पोक्सो एक्ट लगाना थी।
थाना एमआईजी
केस क्रमांक 401/25 में 65(2),(एफ) 64(1) बीएनएस और 5/6 पोक्सो एक्ट की धारा लगाई। जबकि आरोपित पीड़िता का रिश्तेदार था। इस केस में 5/6 के स्थान पर 5(एन), 6 और नाबालिग पीड़िता गर्भवती होने से धारा 5(जे-11)/6 पोक्सो एक्ट लगाना थी।
थाना देपालपुर
केस 259/25 में धारा 115(2), 351,(3), 64(2)(एम) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया। आरोपित ने पीड़िता को लाइटर से जलाया था। इस मामले में धारा 115(2) के स्थान पर 118(1) लगाना थी।
गड़बड़ी में कायमीकर्ता नहीं, अफसर जिम्मेदार
विशेष पुलिस महानिदेशक के पत्र में स्पष्ट लिखा है कि गड़बड़ी में कायमीकर्ता से जवाब नहीं मांगा जाएगा। ध्यान रखने की जिम्मेदारी वरिष्ठ अफसरों की है। पूर्व में भी जुलाई में 423 प्रकरणों की समीक्षा में 108 प्रकरणों में धारा घोटाला मिला था, लेकिन डीसीपी और एसपी ने जवाब नहीं भेजा।
इधर पुरुष पुलिस पूछती है बच्चियों से ‘छेड़छाड़’
कमिश्नरेट में महिला संबंधित अपराधों में गंभीरता का अभाव है। कई थानों में महिला अफसर नहीं हैं। दुष्कर्म, छेड़छाड़ और मारपीट की पीड़िताओं को पुरुषों को घटना बतानी पड़ती है। बच्चियों को एफआईआर के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
छत्रीपुरा, परदेशीपुरा, कनाड़िया, तिलकनगर, हीरानगर, एमजी रोड, पलासिया और राऊ थानों में महिला अफसर नहीं है। एफआईआर के लिए दूसरे थाने से एसआई बुलाना पड़ता है। कायमी के बाद भी पुरुष पुलिस अफसर ही जांच करते हैं।