
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश में बढ़ते ड्रग्स कारोबार, अंतरराज्यीय साइबर अपराध और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर इंदौर में शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय डीजीपी कान्फ्रेंस में कई अहम फैसले लिए गए। मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और विभिन्न केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) ने संयुक्त रणनीति तैयार करते हुए स्पष्ट किया कि अब अपराधियों को राज्यों की सीमाओं का फायदा नहीं उठाने दिया जाएगा।
बैठक में सबसे ज्यादा फोकस राजस्थान से मध्यप्रदेश तक फैले ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने पर रहा। अधिकारियों ने माना कि राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भवानीमंडी, झालावाड़ और निंबाहेड़ा क्षेत्र से बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी मध्यप्रदेश तक पहुंच रही है। इस नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई के लिए दोनों राज्यों की पुलिस संयुक्त अभियान चलाएगी। इसके लिए समन्वय बनाए रखने हेतु दोनों राज्यों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो सूचना साझा करने से लेकर कार्रवाई तक की निगरानी करेंगे।
कान्फ्रेंस में यह भी तय किया गया कि किसी भी राज्य में अपराध कर दूसरे राज्य में छिपने वाले आरोपियों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। फरार बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए दोनों राज्यों की पुलिस लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान करेगी और आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त दबिश भी देगी। इंटेलिजेंस एडीजी ए.साईं मनोहर के अनुसार फरार अपराधियों का डेटा,डोजियर और जानकारी भी साझा की जाएगी।
बैठक में साइबर अपराध भी प्रमुख एजेंडे में रहा। अधिकारियों ने बताया कि करीब एक हजार ऐसे साइबर फ्राड के प्रकरण हैं, जिनमें पीड़ित मध्यप्रदेश के हैं जबकि आरोपियों के तार राजस्थान से जुड़े हुए हैं। ऐसे मामलों में जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज करने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाने पर सहमति बनी। तकनीकी जानकारी, बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों की लोकेशन साझा कर संयुक्त कार्रवाई की जाएगी। भरतपुर क्षेत्र के कईं अपराधी डिजिटल अरेस्ट और ओएलएक्स फ्राड में लिप्त है।
कान्फ्रेंस में महिला सुरक्षा को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। सार्वजनिक स्थानों, पर्यटन क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास पुलिस की सक्रियता बढ़ाने, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में त्वरित कार्रवाई के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व की सुरक्षा व्यवस्था भी बैठक का महत्वपूर्ण विषय रही। अधिकारियों ने प्रयागराज महाकुंभ और जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के दौरान अपनाए गए भीड़ प्रबंधन माडल, ट्रैफिक नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन साझा किया। उद्देश्य यह है कि सिंहस्थ-2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके और किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
डीजीपी कान्फ्रेंस का संदेश साफ रहा कि ड्रग्स तस्करी, साइबर फ्राड और संगठित अपराध से निपटने के लिए अब राज्य अलग-अलग नहीं, बल्कि संयुक्त मोर्चे पर काम करेंगे। साझा सूचना तंत्र, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और संयुक्त आपरेशन के जरिए अपराधियों पर तेज और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस समन्वय से अंतरराज्यीय अपराधों पर लगाम लगाने में बड़ी सफलता मिल सकेगी।
यह भी पढ़ें- इंदौर में क्राइम ब्रांच बनकर 7 लाख रूपये लूटने वाले गिरोह वकील भी शामिल