• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

धर्म, संस्कृति और रिट... तीन संवैधानिक धाराओं पर भी टिका रहा भोजशाला केस

धार भोजशाला मामले में 15 मई को सुनाए गए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय में केवल इतिहास, पुरातत्व और धार्मिक दावों पर ही तर्क का उल्लेख नहीं है, बल्कि...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 19 May 2026 07:27:20 PM (IST)Updated Date: Tue, 19 May 2026 07:27:20 PM (IST)
धर्म, संस्कृति और रिट... तीन संवैधानिक धाराओं पर भी टिका रहा भोजशाला केस
धार भोजशाला केस

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार भोजशाला मामले में 15 मई को सुनाए गए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय में केवल इतिहास, पुरातत्व और धार्मिक दावों पर ही तर्क का उल्लेख नहीं है, बल्कि संविधान के कई महत्वपूर्ण अनुच्छेद भी सुनवाई के केंद्र में रहे। खास तौर पर अनुच्छेद-25, अनुच्छेद-29 और अनुच्छेद- 226 को लेकर कोर्ट में हुई लंबी कानूनी चर्चा भी फैसले में दर्ज हुई है। दरअसल, यह पूरा मामला हाई कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत दायर रिट याचिकाओं के रूप में पहुंचा था। इसी कारण कोर्ट ने सबसे पहले यह परखा कि क्या ऐसे धार्मिक और पूजा स्थल से जुड़े विवाद सीधे हाई कोर्ट में लाए जा सकते हैं या नहीं।

सिविल कोर्ट और वक्फ कानून के विकल्पों पर भी हुई चर्चा

यह सवाल भी उठा कि क्या याचिकाकर्ताओं को पहले सिविल कोर्ट जाना चाहिए था और क्या वक्फ कानून के तहत अन्य कानूनी उपाय उपलब्ध थे। कोर्ट ने यह भी देखा कि जनहित याचिका के रूप में दायर याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं। फैसले में एकाधिक स्थानों पर यह उल्लेख किया गया कि याचिकाकर्ताओं ने अपने धार्मिक अधिकारों के लिए अनुच्छेद-25 का सहारा लिया। इस अनुच्छेद के तहत नागरिकों को अपने धर्म का पालन और पूजा-अर्चना करने की स्वतंत्रता मिलती है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से कहा कि भोजशाला में पूजा पर लगी पाबंदियां उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।


सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का जिक्र

इसके साथ ही अनुच्छेद-29 (सांस्कृतिक अधिकार) का भी हवाला दिया गया। याचिकाओं में कहा गया कि भोजशाला केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत शिक्षा और प्राचीन विरासत का प्रतीक है इसलिए इसके संरक्षण का मुद्दा सांस्कृतिक अधिकारों से भी जुड़ता है। पूरे मामले की सुनवाई का आधार अनुच्छेद-226 बना, जो हाई कोर्ट को रिट जारी करने और सरकारी आदेशों की वैधता जांचने की शक्ति देता है। इसी अनुच्छेद के तहत भोजशाला परिसर में पूजा-अधिकार, नमाज व्यवस्था, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वर्ष 2003 के आदेश और धार्मिक दावों को चुनौती दी गई। फैसले में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 का भी जिक्र हुआ। कोर्ट ने इस पहलू पर भी विचार किया कि क्या इस कानून के रहते हुए ऐसे विवादों पर सुनवाई की जा सकती है। यही वजह है कि भोजशाला मामला अब केवल स्थानीय धार्मिक विवाद नहीं रहा, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और अदालतों की शक्तियों पर राष्ट्रीय स्तर की कानूनी बहस का केंद्र बन गया है।

जानिए क्या है अनुच्छेद- 226 और क्यों है यह महत्वपूर्ण

भारतीय संविधान का अनुच्छेद- 226 हाई कोर्ट को यह शक्ति देता है कि वह किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा और सरकारी आदेशों की वैधता जांचने के लिए रिट जारी कर सके। भोजशाला मामले में इसी अनुच्छेद के तहत पूजा-अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े मुद्दे हाई कोर्ट में उठाए गए।

इसलिए महत्वपूर्ण...

  • इसके जरिये नागरिक सीधे हाई कोर्ट पहुंच सकते हैं
  • मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर रिट दाखिल की जा सकती है
  • सरकारी आदेश और प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी जा सकती है
  • धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों में भी इस्तेमाल संभव

यह होती है रिट याचिका

जब कोई व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा या सरकारी फैसले को चुनौती देने के लिए सीधे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाता है, तो उसे रिट याचिका कहा जाता है।

यह भी पढ़ें- एमपी में खजाने के लिए इकलौते बेटे की बलि दी, दोषी पिता को आजीवन कारावास