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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार भोजशाला को लेकर 15 मई 2026 को आए हाई कोर्ट की युगलपीठ के ऐतिहासिक फैसले के विरुद्ध मौला कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील प्रस्तुत कर दी है। सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने इसकी पुष्टि की है। हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध एक अपील सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित है। दोनों अपीलों की सुनवाई कब होगी यह स्पष्ट नहीं है।
15 मई 2026 को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने धार भोजशाला को लेकर 242 पेज का फैसला सुनाया था। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि भोजशाला मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर ही है। कोर्ट ने 7 अप्रैल 2023 को जारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसमें प्रति शुक्रवार मुस्लिम पक्ष को दोपहर एक से तीन के बीच नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।
हाई कोर्ट के इस फैसले के एक दिन बाद ही एएसआई ने भोजशाला में हिंदू पक्ष को 365 दिन निर्बाध पूजा की अनुमति दे दी। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भोजशाला पहुंचकर वहां पूजन किया था। हाई कोर्ट के 15 मई के फैसले को चुनौती देते हुए एक अपील काजी मोइनुद्दीन ने 21 मई को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की थी। अब एक और अपील मौला कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने दायर की है।
मौला कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत अपील में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए इसे गलत बताया और ये आधार लिए -
यह मांग है अपील में -
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