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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थियों ने स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की परीक्षा में मिलने वाले अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा या कम्पेन्सेटरी टाइम) को और बढ़ाने की मांग की है।
इस संबंध में छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को लिखित आवेदन दिए हैं और मौजूदा एक घंटे के अतिरिक्त समय में 15 मिनट और जोड़ने पर जोर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल इस मांग को मानने से साफ इनकार कर दिया है।
विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार संस्था अपनी परीक्षाओं में यूजीसी के नियमों का पालन कर रही है। नियमानुसार तीन घंटे के प्रश्न पत्र को हल करने के लिए दिव्यांग विद्यार्थियों को एक घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाता है। इससे अधिक समय नहीं बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी के निर्देशों के तहत ही समय का निर्धारण किया गया है।
दरअसल 2024 तक यूनिवर्सिटी अपनी वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाओं में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को 30 मिनट का अतिरिक्त समय देता था। इस व्यवस्था को लेकर यूजीसी की दिव्यांग समिति ने जनवरी 2025 में विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद समिति ने परीक्षा में दिए जाने वाले अतिरिक्त समय को 30 मिनट से बढ़ाकर 60 मिनट करने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश को कार्यपरिषद ने 10 जनवरी 2025 की बैठक में मंजूरी दे दी थी।
यूनिवर्सिटी ने अब अपनी परीक्षाओं में अतिरिक्त समय के लिए ‘एक्स्ट्रा टाइम’ या ‘एडिशनल टाइम’ शब्द की जगह ‘कम्पेन्सेटरी टाइम’ शब्द का उपयोग शुरू किया है। जारी निर्देशों के अनुसार जिन दिव्यांग विद्यार्थियों को लेखक, रीडर या लैब असिस्टेंट की सुविधा दी जाती है, उन्हें परीक्षा के प्रत्येक घंटे के लिए कम से कम 20 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके अलावा बेंचमार्क दिव्यांगता वाले अभ्यर्थी को तीन घंटे की परीक्षा में कम से कम एक घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाता है।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी का कहना है कि यूजीसी के निर्देश मिलने के बाद ही अतिरिक्त समय को बढ़ाया जाएगा, लेकिन अभी इस संबंध में कोई नया निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ विद्यार्थियों के आवेदन प्राप्त हुए थे। दिव्यांग विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान प्रश्नों को समझने और उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त समय दिया जा रहा है।