एक रुपये में ऐप डाउनलोड करना पड़ा भारी, खाते से पहले कटे 299 रुपये; ऑटो-पे बंद करने के बाद भी निकले 38,300
इंदौर में एक रुपये में फंडा एप डाउनलोड करना युवक को महंगा पड़ा। ऑटो-पे बंद करने के बावजूद यूपीआइ और ऑनलाइन शापिंग से 38,300 रुपये निकल गए।
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 07:35:26 AM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 07:35:26 AM (IST)
एक रुपये में ऐप डाउनलोड करना पड़ा भारी।HighLights
- युवक ने प्ले स्टोर से फंडा एप डाउनलोड किया था।
- एक रुपये भुगतान के बाद खाते से 299 रुपये कटे।
- ऑटो-पे बंद करने के बावजूद कई ट्रांजेक्शन हुए बाद में।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: एक रुपये में एप डाउनलोड करना आर्टिफिशियल ज्वैलरी दुकान पर काम करने वाले युवक को भारी पड़ गया। प्ले स्टोर से फंडा एप डाउनलोड करने के बाद उसके कोटक महिंद्रा बैंक खाते से पहले 299 रुपये आटो-पे के जरिए कटे। ऑटो-पे बंद करने के बावजूद अगले कुछ दिनों में अलग-अलग यूपीआइ आइडी और ऑनलाइन शापिंग के जरिए खाते से कुल 38,300 रुपये निकल गए। मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है।
ये है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार श्यामलाल निवासी राजमहल कॉलोनी ने शिकायत की है। वह नई बागड़-रानीपुरा में आर्टिफिशियल ज्वैलरी की दुकान पर काम करता है। 27 जुलाई को उसने मोबाइल में फंडा एप डाउनलोड किया था। एप का चार्ज एक रुपये होने पर उसने फोनपे से एक रुपये का भुगतान किया। अगले दिन उसके खाते से 299 रुपये आटो-पे के जरिए कट गए। उसने तत्काल आटो-पे बंद कर दिया।
रात में एक के बाद एक ट्रांजेक्शन
- इसके बाद 28 जुलाई शाम करीब चार बजे उसके खाते से 4999 रुपये डेबिट हुए। बैंक एप में देखने पर रकम हीरालाल शॉ की यूपीआइ आइडी में जाना सामने आया। 29 जुलाई को फिर 1999-1999 रुपये दो अलग-अलग यूपीआइ आइडी में ट्रांसफर हुए। इसी दौरान 5000 रुपये डेबिट होकर वापस खाते में क्रेडिट होने का मैसेज भी आया, लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक रकम वास्तव में खाते में नहीं आई।
- 31 जुलाई तड़के करीब 3 बजे खाते से 4999 रुपये गुलशन कुमार की यूपीआइ आइडी में गए। इसके कुछ मिनट बाद बिगबास्केट पर 10 हजार रुपये की शॉपिंग हुई और फिर जार गोल्ड एप के जरिए 10 हजार रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर किए गए।
श्यामलाल के अनुसार अज्ञात व्यक्ति ने उसके बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 38,300 रुपये निकालकर वित्तीय धोखाधड़ी की। उसने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।