
इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि
पूरे शहर में करीब कई ऐसे खतरनाक स्पॉट हैं, जहां खराब इंजीनियरिंग के कारण आए दिन दुर्घटनाओं के कारण मौतें हो रही हैं। इन डेंजर जोन से हादसे टालने की कवायद प्रशासन सालों से कर रहा है। पिछले महीने भी प्रशासनिक अधिकारियों ने खतरनाक स्थान चिन्हित किए थे। इनके बदलाव की रूपरेखा भी तैयार की गई थी, लेकिन वह कागजों पर ही सीमित है। राऊ से शिप्रा बायपास पर ही 30 स्पॉट ऐसे हैं, जहां शायद ही किसी दिन हादसा न हुआ हो।
बायपास की सर्विस लाइन पर गुरुवार को महालक्ष्मी नगर (एमआर-4) निवासी संजय मुखर्जी प्रशासन की लापरवाही का शिकार हो गए। बाइक पर आ रहे संजय को सामने कार से आ रही महिला ने टक्कर मार दी। हादसे में संजय की मौके पर ही मौत हो गई। यहां आए ऐसी घटनाएं हो रही हैं। सर्विस लाइन से दो स्कूलों (शिशु कुंज व दिल्ली पब्लिक स्कूल) की बसें निकलती हैं। दोपहिया वाहनों का भी इसी सड़क से आना-जाना है। कई बार ओवरटेक करने में सामने से ही टक्कर होती है।
सीधे सड़क पर निकलते हैं रास्ते
सर्विस लाइन पर हादसों का सबसे बड़ा कारण इससे जुड़े रास्ते हैं, जहां से वाहन चालक सीधे सर्विस लाइन पर पहुंचते हैं, जिन्हें इस रोड पर आ रहे वाहन चालक नहीं देख पाते हैं। इनमें कई तेज रफ्तार भारी वाहन भी रहते हैं, जो हादसों का कारण बनते हैं।
आए दिन होते हैं हादसे
पान दुकानदार अभीत मंडलोई ने बताया कनाड़िया जंक्शन (बायपास) पर आए दिन हादसे होते हैं। इनमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। कई हादसे तो ऐसे हुए जिन्हें अब तक नहीं भूल पाए।
स्कूल बसें भी दुर्घटना का कारण
राहगीर गप्पू सिंह ने बताया कि बायपास पर दो निजी स्कूलों की सौ से अधिक बसें एक साथ निकलती हैं। इनसे जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार तो बसें पुलिया में फंस जाती हैं। इन्हें डायवर्ट करने के लिए अलग से व्यवस्था करना जरूरी है, अन्यथा बच्चों के साथ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बचकर निकल गए तो अच्छी किस्मत
कनाड़िया निवासी देवेंद्र यादव ने बताया कि वे गीता भवन क्षेत्र में निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। जंक्शन पर स्थित पुलिया इतनी खतरनाक है कि दोपहिया गाड़ी से बचकर निकलने के बाद अपने आप को खुशकिस्मत मानता हूं।
ट्रैफिक पुलिस के बजाय ड्राइवर संभालते हैं व्यवस्था
राहगीर दीपेश पुरोहित ने बताया कि कनाड़िया जंक्शन पर आए दिन जाम लगता है। कनाड़िया गांव जाने वाली व अग्रवाल भवन के पास बनी पुलिया के पास दो से तीन घंटे यही स्थिति रहती है। इस दौरान वाहन चालक ही व्यवस्था संभालते हैं। यहां ट्रैफिक पुलिस का जवान नहीं रहता है।
कई स्थानों पर नहीं लगे संकेत
एक स्कूल बस के ड्राइवर सुनील ने बताया कि यहां पूरे रास्ते में धीमे चलने, दाएं-बाएं मुड़ने के संकेतक नहीं लगाए गए। इससे वाहन चालकों को परेशानी होती है।
स्ट्रीट लाइट भी नहीं
दोपहिया वाहन चालक जितेन्द्र साधु ने बताया यहां आधे रास्ते में स्ट्रीट लाइट है । सर्विस लाइन में तो कई स्थानों पर खंभे लगाकर छोड़ दिए गए। हादसों की शिकायतों के बाद भी यहां स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई जा रही।
तैयार करा रहे सर्वे रिपोर्ट
खतरनाक स्पाट का दौरा किया था, इसकी सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जो स्थान ज्यादा खतरनाक हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इन स्थानों की कमियां दूर करने के लिए एक माह में काम शुरू किया जाएगा।
मालिनी गौड़, महापौर
चार माह में पूरा होगा काम
पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और पुलिस ने सभी स्थानों का सर्वे किया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में जो भी कमी है, उन्हें दूर करने की तैयारी पूरी हो चुकी है, चार महीनों में काम पूरा कर दिया जाएगा। संकेतक व अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।
हरिनारायणचारी मिश्र, पुलिस उपमहानिरीक्षक