
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल की गंभीर समस्या को देखते हुए नगर निगम प्रशासन अब पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में आ गया है। जल संकट और बीमारी के मुख्य कारण यानी पाइपलाइन के लीकेज को खोजने के लिए निगम ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
निगम प्रशासन ने भागीरथपुरा में निगरानी और निरीक्षण के लिए एक भारी-भरकम टीम तैनात की है। शनिवार से ही इस क्षेत्र में पानी की सैंपलिंग और लीकेज खोजने के काम की कमान आठ अपर आयुक्तों को सौंपी गई है। इनमें हाल ही में निगम में शामिल हुए तीन नए अपर आयुक्तों के साथ पहले से मौजूद पांच अपर आयुक्त भी शामिल हैं। प्रशासन का लक्ष्य हर हाल में उस स्रोत का पता लगाना है जहां से पीने के पानी में गंदगी मिल रही है।
लीकेज की सघन जांच के लिए भागीरथपुरा की 32 गलियों के लिए 32 बीट निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक गली की जिम्मेदारी एक उपयंत्री (Sub-Engineer) या सहायक यंत्री (Assistant Engineer) को दी गई है। ये इंजीनियर अपनी-अपनी गलियों में सफाई व्यवस्था, सैंपलिंग और लीकेज की बारीकी से जांच कर रहे हैं। अभियान के तहत नर्मदा जल वितरण लाइन के 15 मुख्य स्थानों पर गड्ढे खोदकर पाइपलाइन की भौतिक जांच की गई। इस प्रक्रिया में सात स्थानों पर बड़े लीकेज मिले हैं, जिन्हें तत्काल दुरुस्त करने का काम किया गया है।
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सुरक्षा के लिहाज से शनिवार को भागीरथपुरा की मुख्य टंकी से जल वितरण पूरी तरह बंद रखा गया। पानी की कमी को दूर करने के लिए पूरे क्षेत्र में टैंकरों के माध्यम से पानी भेजा गया है। साथ ही, संक्रमण को रोकने के लिए क्षेत्र के 100 सार्वजनिक और निजी बोरिंग में क्लोरीन डालने का काम भी किया गया है। निगम का अमला यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि पाइपलाइन के लीकेज पूरी तरह बंद होने तक लोगों को स्वच्छ पेयजल का विकल्प मिलता रहे।