
टीम नईदुनिया। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जो अब हर घर, हर गिलास और हर घूंट से जुड़ गया है… हम जो पानी पी रहे हैं, वह वाकई कितना शुद्ध है? पानी की शुद्धता परखने का ऐसा ही एक पैमाना है टीडीएस (टोटल डिसोल्वड सालिड)- यानी पानी में घुले वे ठोस तत्व, जो दिखते नहीं, लेकिन सेहत पर गहरा असर छोड़ सकते हैं।
‘हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ’ अभियान के तहत नईदुनिया की टीम टीडीएस और क्लोरीन मीटर लेकर मंगलवार को अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ मालवा-निमाड़ के मैदान में उतरी। टंकियों से सप्लाई पानी से लेकर बोरिंग के पानी तक की जांच की गई। अधिकांश स्थानों पर टीडीएस के आंकड़े 300 से 400 के बीच मिले, जबकि कुछ जगहों पर यह 500 से ऊपर पहुंचा। विशेषज्ञों के मुताबिक, 500 से अधिक टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक पीना सेहत के लिए खतरा बन सकता है।
देवास (टीडीएस 400) : शहर की मेन चौपाटी क्षेत्र से लिए गए सैंपल में टीडीएस 400 पाया गया। जांच के दौरान पीएच वैल्यू 8 से 9 के बीच रही। केमिस्ट के अनुसार 8 से 12 पीएच तक का पानी सामान्य माना जाता है, लेकिन टीडीएस सुरक्षित सीमा के करीब है। इस क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों लोग पानी का उपयोग करते हैं।
रतलाम (टीडीएस 500+) : कुंजड़ों का वास क्षेत्र में पार्षद सलीम बागवान की मौजूदगी में की गई जांच में निगम की नल सप्लाई और बोरिंग—दोनों का टीडीएस 500 से अधिक पाया गया। अशोक नगर, मालीकुआ, लक्ष्मी नगर, रत्नेश्वर रोड, हकीमवाड़ा और बसंत कालोनी सहित अन्य क्षेत्रों में भी यही स्थिति रही। कुंजड़ों का वास में एक परिवार के पांच सदस्यों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत मिली, जिनमें एक का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। मटमैले पानी की आपूर्ति के चलते लोग आरओ केन मंगवाने को मजबूर हैं।
धार (टीडीएस 580–680) : धारेश्वर मार्ग के नल के पानी में टीडीएस 580 और मतरकंडू संपवेल में 680 पाया गया। दोनों स्थानों पर पीएच वैल्यू सामान्य रही, लेकिन कई क्षेत्रों में नल का पानी कीचड़युक्त मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।
खरगोन (टीडीएस 300–400) : वार्ड 30 व 31 में टीडीएस औसत 340 से 400 तक रहा। पीएचई 7.2 से लेकर 7.5 रहा। क्लोरीजन 0.3 मिल रहा है। दो दिन में 50 टीडीएस की जांच की गई है। इसमें सामन्य टीडीएस है।
खंडवा (टीडीएस 700) : अलग-अलग वार्डों में जांच के दौरान 600 से 700 टीडीएस लेवल सामने आ रहा है। वहीं एचपी लेवल 7.4 के करीब बताया गया है। वर्तमान में 23 हजार घरों में नल कनेक्शन के जरिए पानी वितरित किया जा रहा है।
शाजापुर (टीडीएस 200–800) : शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी की जांच में टीडीएस 200 से लेकर 800 पीपीएम तक पाया गया। इंदौर के भागीरथपुरा मामले के बाद नगर पालिका ने सैंपलिंग बढ़ा दी है।
नीमच (टीडीएस 270–274) : नगर पालिका क्षेत्र में नौ स्थानों पर जांच में टीडीएस 270 से 274 और पीएच 7 पाया गया। केमिस्ट के अनुसार पानी गुणवत्ता की दृष्टि से उपयुक्त है।
मंदसौर (टीडीएस 500–714) : रामटेकरी क्षेत्र में नल के पानी का टीडीएस 500 और नई आबादी क्षेत्र के ट्यूबवेल में 714 दर्ज किया गया। कई इलाकों में गदला पानी आने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
उज्जैन (टीडीएस 700) : ‘नईदुनिया’ द्वारा 54 वार्डों में 72 सैंपल की जांच की गई। इनमें 18 कालोनियों का पानी स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त पाया गया। कुछ बोरिंग सैंपल में टीडीएस 700 तक पहुंचा। शहर की 450 कालोनियों में से 90 कालोनियां पीएचई पाइपलाइन के अभाव में बोरिंग और हैंडपंप पर निर्भर हैं, जहां टीडीएस अधिक है।
बड़वानी (टीडीएस 500) : औसत 500 टीडीएस तक पानी मिल रहा है। गत माह नपा द्वारा नर्मदा जल, पानी की टंकियों, घरेलु व शासकीय नलों के पानी के सैंपल लेकर पीएचई की लैब में जांच के लिए दिए थे। लैब में 14 प्रकार से पानी की भौतिक व रासायनिक जांच की गई।
टीडीएस (टोटल डिसोल्वड सालिड) का मतलब है- पानी में घुले हुए कुल ठोस पदार्थ। इसमें मुख्य रूप से कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, सल्फेट, नाइट्रेट शामिल होते हैं। टीडीएस एमजी/एल (मिलीग्राम प्रति लीटर) या पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) में मापा जाता है। पानी के मामले में दोनों इकाइयां व्यावहारिक रूप से एक समान मानी जाती हैं।
इजराइल और जार्डन में डेड सी (समुद्र नहीं, झील) का टीडीएस 3,40,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है। यह पानी इतना खारा है कि पीना असंभव है।
राजस्थान के नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर के इलाकों में टीडीएस 3000 से 8000 मिलीग्राम प्रति लीटर है। गुजरात के कच्छ, सौराष्ट्र में भी भूजल बहुत खारा है।
टीडीएस मीटर बैक्टीरिया नहीं बताता है। सिर्फ पानी में घुलनशील ठोस बताता है। बैक्टीरिया जांच के लिए माइक्रोबायोलाजिकल टेस्ट जरूरी होता है।
ज्यादा टीडीएस का मतलब यह नहीं है कि पानी हमेशा ही जहरीला हो। कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कुछ मिनरल (निर्धारित सीमा में) शरीर के लिए जरूरी भी होते हैं।
आरओ पानी का टीडीएस कई बार बहुत कम (20 से 50 मिलीग्राम प्रति लीटर तक) हो सकता है। बहुत कम टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक पीने पर मिनरल की कमी की आशंका हो सकती है।