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इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला... 32 आरोपियों के खिलाफ ED ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट

नगर निगम में दो साल पहले हुए फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार्जशीट पेश कर दी है। ईडी इंदौर उपक्षेत्रीय कार्यालय ने फर्जी बिल घोटाले...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 10:47:22 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 10:47:22 PM (IST)
इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला... 32 आरोपियों के खिलाफ ED ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट
इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला

HighLights

  1. इंदौर निगम घोटाले में ED ने दाखिल की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट
  2. मुख्य आरोपी अभय राठौर समेत 32 लोगों को बनाया गया अभियुक्त
  3. 103 करोड़ के गबन में 59 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम में दो साल पहले हुए फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार्जशीट पेश कर दी है। ईडी इंदौर उपक्षेत्रीय कार्यालय ने फर्जी बिल घोटाले में कुल 20 हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश की है। कुल 32 लोगों को आरोपित बनाया है।

घोटाले के मुख्य आरोपित निगम इंजीनियर अभय राठौर के साथ ड्रेनेज व जनकार्य के अन्य कर्मचारी, फर्जी बिल बनाने वाले ठेकेदार फर्मों के संचालक, निगम में बिल-फाइलों का ऑडिट करने वाले स्थानीय निधि लेखा परीक्षा कार्यालय के अधिकारी व दो सहायक व अन्य निजी व्यक्ति शामिल हैं।


ईडी ने आरोपितों के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 में आरोप तय किए हैं। ईडी ने कोर्ट में कहा है कि ये अपराध से अर्जित धन को छिपाने, अपने कब्जे में रखने, उसका रोटेशन करने के बाद चैनलाइज कर लाभ लेने व हिस्सा लेने के आरोपित हैं।

कागजों पर फाइलें बनाकर 103 करोड़ से अधिक का गबन

अगस्त 2024 में घोटाला उजागर हुआ था कि नगर निगम में असल में सिर्फ फाइल बनाई गई और जमीन पर काम किए बगैर उसके बिल पास कर सरकारी खजाने से पैसा भी निकाल लिया गया। मामले में नगर निगम ने पुलिस थाना एमजी रोड में अलग-अलग शिकायतें की थीं। इन पर जांच कर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

एफआईआर इंदौर नगर निगम के कोषागार से फर्जी बिलों, जाली कार्यादेशों (वर्क ऑर्डर), मनगढ़ंत माप पुस्तिकाओं (मेजरमेंट बुक), फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों, हेरफेर किए गए नोटशीटों तथा अन्य जाली दस्तावेजों के माध्यम से सार्वजनिक धन को धोखाधड़ी कर निकालने से जुड़ी है।

सबने बांटा हिस्सा

ईडी ने एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। दस्तावेजी जांच में पता चला कि निगम का ठेका लेने वाली फर्मों के कर्ताधर्ताओं ने ऑडिट कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी वर्कऑर्डर फाइलें और जाली बिल तैयार किए। फर्जी बिलों से ही इंदौर नगर निगम के कोषागार से लगभग 103.42 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि निकालकर उसका गबन किया गया। बाद में इस पैसे को नकद निकाला गया।

घोटाले का धन ठेकेदारों, लोकसेवकों तथा घोटाले में शामिल अन्य लोगों ने बांट लिया। कागजों में फर्जी फर्मों और बैंक खातों से इसे व्यावसायिक लेन-देन का स्वरूप देकर संबंधित एवं संबद्ध संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया। बाद में चल एवं अचल संपत्तियों के अधिग्रहण एवं व्यक्तिगत खर्चों में उपयोग किया गया।

20 जगह छापे, 59.18 करोड़ की संपत्तियां कुर्क व फ्रीज

जांच अवधि में ईडी ने 5 व 6 अगस्त 2024 को 20 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। आरोपितों की 22.04 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त और फ्रीज की गईं। इनमें नकदी, बैंक खातों में जमा राशि, सावधि जमा (एफडी), डीमैट होल्डिंग्स तथा म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कई दस्तावेज एवं डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए।

इसके बाद, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रविधानों के तहत दो अस्थायी कुर्की आदेशों से लगभग 37.14 करोड़ रुपये मूल्य की 52 अचल संपत्तियों को भी कुर्क किया। इन संपत्तियों में मप्र के साथ उप्र में स्थित व्यावसायिक संपत्तियां, आवासीय मकान, भूखंड तथा कृषि भूमि शामिल हैं। ईडी द्वारा इस मामले में कुल लगभग 59.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क, जब्त अथवा फ्रीज की जा चुकी हैं।

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ईडी ने जांच के दौरान इस घोटाले के सरगना बताए जा रहे अभय राठौर के साथ ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को अपराध से अर्जित धन के सृजन और उसके शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में केंद्रीय भूमिका के कारण पीएमएलए एक्ट की धारा 19 के तहत गिरफ्तार भी किया। ईडी ने विशेष न्यायालय से पीएमएलए के तहत धन शोधन में प्रयुक्त कुर्क, जब्त एवं फ्रीज की गई संपत्तियों को राजसात करने का अनुरोध भी किया है। विशेष न्यायालय ने आरोपितों को समन जारी कर दिए हैं।