इंदौर में किसानों ने सीखे गांव के साधनों से ही देसी खाद बनाने के नुस्खे
अहिल्या माता गोशाला पर चल रहे प्रशिक्षण शिविर में लहसुन, प्याज एवं अदरक के अर्क से खेती को उन्नत बनाने के तरीके। ...और पढ़ें
By gajendra.nagarEdited By: gajendra.nagar
Publish Date: Sat, 27 Nov 2021 11:57:25 AM (IST)Updated Date: Sat, 27 Nov 2021 11:57:25 AM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अहिल्यामाता गोशाला केसरबाग रोड पर चल रहे पांच राज्यों के किसानों के प्रशिक्षण शिविर में गोमूत्र, निंबोली पावडर, नीम या अरंडी की खली, बीजामृत, बीज एवं पत्तियों के अर्क के साथ ही मिर्च, लहसुन, प्याज एवं अदरक के अर्क से देसी खाद बनाने की विधियों की जानकारी दी गई। भोपाल एवं जबलपुर से आए कृषि विशेषज्ञों ने इन सभी विधियों का प्रशिक्षण देते हुए यह भी बताया कि इस तरह के खाद बनाने में किसी भी तरह की रसायन की जरुरत नहीं होती। इस तरह के सभी खाद को गांव में रहते हुए गांव में उपलब्ध सामग्री से ही तैयार किया जा सकता हैं। इनके उपयोग से हर तरह की मिट्टी को उपजाऊ बनाकर कई गुना अधिक फसल लहलहाई जा सकती है। लागत में भी ये अंग्रेजी खाद से कई गुना कम खर्च पर बन सकते हैं।
अहिल्यामाता गोशाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष रवि सेठी एवं सचिव पुष्पेन्द्र धनोतिया ने बताया कि जैव संसाधन केंद्र के तत्वावधान में चल रहे इस प्रशिक्षण शिविर में जबलपुर कृषि विवि के वैज्ञानिक भी कृषकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रशिक्षण सत्र के चौथे दिन जैव विशेषज्ञ अजीत केलकर एवं रवि केलकर ने अन्य वैज्ञानिकों के साथ किसानों को विभिन्न् तरह के देसी खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि गोमूत्र का सही उपयोग करें तो एक कीट नियंत्रक, जीवाणु रोधी, फफूंदनाशी के रूप में भी इसका उपयोग हो सकता है। गोमूत्र जितना पुराना होगा, खेती के लिए उतना ही लाभप्रद होगा। गोमूत्र को एक मटके या प्लास्टिक के पात्र में रख सकते है, लेकिन इसे लोहे के पात्र में नहीं रखना चाहिए। खेत में सिंचाई जल के साथ 10 लीटर गोमूत्र प्रति एकड़ के मान से फसल में दो से तीन बार उपयोग करें तो जमीन में छिपे हुए फफूंद साफ हो सकते हैं।