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इंदौर में खाते किराए पर लेकर साइबर ठगी, चार गिरफ्तार, 2 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन मिले

साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का हीरानगर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक ज...और पढ़ें

By Mukesh MangalEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 07:29:38 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 07:29:38 PM (IST)
इंदौर में खाते किराए पर लेकर साइबर ठगी, चार गिरफ्तार, 2 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन मिले
पुलिस ने पकड़े चार आरोपी। (एआई इमेज)

HighLights

  1. सैकड़ों सिम कार्ड, एटीएम और बैंक पासबुक जब्त
  2. खातों में 40-40 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन भी मिले
  3. आरोपियों ने यूएसडीटी का कारोबार कबूला

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का हीरानगर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में आरोपितों के पास से साइबर फ्राड में इस्तेमाल किए जाने वाले सैकड़ों सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक मिलने दावा किया गया है।

पुलिस को इनके खातों में करीब दो करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी मिली है। इनमें कई ऐसे ट्रांजैक्शन भी सामने आए हैं, जिनमें करीब 40-40 लाख रुपये की बड़ी रकम का लेन-देन हुआ। इस गिरोह द्वारा यूएसडीटी के माध्यम से ठगी करना स्वीकारा है।


टीआई सुशील पटेल के अनुसार, आरोपित लोगों को झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और बाद में इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था।

भारत सरकार के संबंधित साइबर समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए आरोपितों सुरेंद्र चौहान निवासी नेहरू नगर, मोहित उर्फ अनमोल कुशवाह, अमितेष रघुवंशी निवासी गुना और श्याम रघुवंशी अशोकनगर को पकड़ा।

तलाशी में उनके पास से बड़ी संख्या में सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक बरामद की गईं। पुलिस इन दस्तावेजों और सिम कार्ड का मिलान अलग-अलग साइबर अपराधों से कर रही है। अशोक नगर का मोनू रघुवंशी फरार है। पुलिस को प्रारंभिक जांच में ही दो करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी मिलने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन खातों से आई और कहां ट्रांसफर की गई।

खासतौर पर 40-40 लाख रुपये के बड़े ट्रांजेक्शन पुलिस के रडार पर हैं। आरोपित पूर्व में भी साइबर फ्राड के मामलों में जेल जा चुके हैं। इनके खिलाफ पहले से कई अपराध दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब पुराने मामलों और वर्तमान नेटवर्क के बीच कनेक्शन की जांच कर रही है।

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