
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रिंग रोड और एमआर-10 के सबसे व्यस्त चौराहों में शामिल रेडिसन चौराहे को जाम से राहत दिलाने के लिए फ्लाईओवर निर्माण की दिशा में इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) ने ट्रैफिक फिजिबिलिटी अध्ययन पूरा कर लिया है।
अध्ययन में चार अलग-अलग विकल्पों की तकनीकी जांच की गई। इनमें एमआर-10 के समानांतर रेडिसन होटल की ओर चार लेन फ्लाईओवर को सबसे उपयुक्त माना गया है। हालांकि फ्लाईओवर निर्माण पर अंतिम फैसला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में होगा।
आइडीए अध्ययन रिपोर्ट समिति के समक्ष रखेगा। अनुमति मिलने के बाद डीपीआर तैयार कर टेंडर सहित अन्य प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि एक साल बाद इस चौराहे पर फ्लाईओवर की उपयोगिता अधिक होगी, क्योंकि इंदौर-बेतुल हाईवे तैयार होने के बाद इस सड़क का पूरा यातायात रेडिसन चौराहे पर ही आकर थमेगा।
रेडिसन चौराहे से प्रतिदिन 1.78 लाख वाहन गुजरते हैं। इसमें करीब 55 प्रतिशत दोपहिया और 33 प्रतिशत कारें हैं। यहां पर मुख्य सड़क पर लगभग 1.50 लाख और सर्विस रोड पर 27,562 वाहनों का दबाव रहता है। पीक आवर्स में यहां लंबा जाम लगने के साथ वाहन चालकों को सिग्नल पर लंबा इंतजार करना पड़ता है। रोबोट चौराहे पर फ्लाईओवर बनने के बाद रिंग रोड का अधिकांश यातायात रेडिसन चौराहे पर आकर थमेगा। वहीं बायपास की तरफ से आने वाले वाहनों का दबाव भी चौराहे पर बढ़ेगा।
आइडीए सीईओ परीक्षित झाड़े का कहना है कि रेडिसन चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण का सर्वे कराया गया है। रिपोर्ट को सड़क सुरक्षा समिति में रखा जाएगा और यहां पर निर्णय होने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। आने वाले समय में चौराहे पर वाहनों का दबाव बढ़ेगा, इसलिए फ्लाईओवर जरूरी होगा।
अध्ययन के दौरान रिंग रोड और एमआर-10 पर फ्लाईओवर तथा अंडरपास सहित चार विकल्पों की जांच की गई। रिंग रोड पर प्रस्तावित फ्लाईओवर मेट्रो लाइन से टकरा रहा था। वहीं अंडरपास के लिए 1200 एमएम की सीवर ट्रंक लाइन और जलापूर्ति पाइपलाइन बाधा बन रही थी। एमआर-10 पर अंडरपास भी मेट्रो के फाउंडेशन पिलरों के कारण तकनीकी रूप से संभव नहीं पाया गया। इसके बाद विशेषज्ञों ने एमआर-10 के समानांतर रेडिसन होटल की ओर फ्लाईओवर का विकल्प चुना।
चौराहे पर चार लेन फ्लाईओवर के लिए 25 से 26 मीटर चौड़ी उपलब्ध भूमि का उपयोग किया जाएगा। यह फ्लाईओवर रेडिसन होटल की तरफ के ग्रीन बेल्ट और जमीन पर बनेगा। इससे मेट्रो के पिलर और ट्रैक प्रभावित नहीं होंगे। फ्लाईओवर बनने के बाद चौराहे पर सिग्नल का इंतजार कम होने और यातायात का प्रवाह तेज हो सकेगा।
रेडिसन चौराहे पर फ्लाईओवर की जरूरत आने वाले समय में बढ़ेगी, क्योंकि रिंग रोड पर रोबोट चौराहे का फ्लाईओवर बनाया जाना है। वहीं इंदौर-बैतूल हाईवे से आने वाले वाहनों का दबाव भी बढ़ेगा। अध्ययन के मुताबिक एमआर-10 पर भविष्य में करीब 20 प्रतिशत अतिरिक्त यातायात बढ़ सकता है। ऐसे में रेडिसन चौराहे पर फ्लाईओवर यातायात प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हो जाएगा।
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