
नीरज व्यास, नईदुनिया इंदौर। शहर के नंदानगर क्षेत्र में बना चार मंजिला सरकारी सिविल अस्पताल निर्माण में हुई बड़ी लापरवाही के कारण चर्चा में है। साढ़े आठ करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ यह अस्पताल फरवरी महीने में शुरू तो कर दिया गया, लेकिन इसमें मरीजों को ऊपरी मंजिलों पर ले जाने के लिए जरूरी रैंप का निर्माण ही नहीं किया गया।
सरकारी नियमों के अनुसार जिस भी अस्पताल में आईपीडी संचालित होती है, वहां रैंप होना अनिवार्य है। इसके बावजूद नई इमारत को बिना रैंप के हैंडओवर कर दिया गया और संचालन भी शुरू हो गया। जिम्मेदार अधिकारी अब तक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
नंदानगर सिविल अस्पताल 50 बिस्तरों का है, जहां हर समय 20 से 25 मरीज भर्ती रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या प्रसूता महिलाओं की होती है। अस्पताल में सीढ़ियों के अलावा मरीजों को ले जाने के लिए केवल एक ही लिफ्ट है। आगजनी या भूकंप जैसी आपात स्थिति में लिफ्ट बंद कर दी जाती है, ऐसे में मरीजों को नीचे लाने का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं बचता।
अस्पताल में सिर्फ रैंप की ही कमी नहीं है। नया निर्माण होने के बावजूद बारिश के मौसम में बेसमेंट में जमीन से पानी भर गया था, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार अस्पताल के निर्माण के लिए कुल 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जबकि निर्माण 8 करोड़ 66 लाख रुपये में पूरा हुआ है। अब जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि बची हुई राशि से अस्पताल में रैंप का निर्माण कराया जाएगा।
अस्पताल में रैंप नहीं है इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों कोे भी है। हमने इसके निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर सीएमएचओ कार्यालय को भेजा है। आगे का निर्णय वहीं से होगा।
- डॉ. रुपाली जोशी, प्रभारी, नंदानगर सिविल अस्पताल
अस्पताल में रैंप बनाने को लेकर इंजीनियर को आंकलन करने का कहा है। क्षेत्रीय विधायक के संज्ञान में भी यह बात लाई गई है। हर मंजिल से मेटेलिक रैंप बनाए की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
-डॉ. माधव हासानी, सीएमएचओ