
लोकेश सोलंकी, इंदौर नईदुनिया। खाने की चीजें तलने के लिए एक ही तेल के बार-बार इस्तेमाल से सेहत खराब हो सकती है। इस बारे में समझाश देने के बाद अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने कानून बना दिया है। कारोबारियों पर नियम लागू कर दिया है कि इस्तेमाल तेल की मात्रा से लेकर बचे तेल को नष्ट करने का रिकॉर्ड उन्हें रखना होगा। रिकॉर्ड का प्रमाणीकरण होगा व जानकारी खाद्य विभाग व एफएसएसआई को देनी होगी। आदेश एक मार्च से लागू हो गया है।
यह नुकसान होता है एक ही तेल में तलने से...
दिल्ली से एफएसएसएआई ने 30 जनवरी को आदेश जारी किया था। इसमें लिखा है कि तलने के लिए एक ही तेल के बार-बार इस्तेमाल से खाने के तेल की प्रकृति और गुण बदल जाते हैं। ऐसे तेल में टोटल पोलर कपाउंड पैदा हो जाते हैं। इसके खाने में इस्तेमाल होने से सेहत पर गंभीर दुष्परिणाम होते हैं। पहले ही नियम बनाकर ऐसे तेल के खाने में इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है जिसमें टीपीसी 25 फीसदी से ज्यादा हो। ऐसा तेल किसी भी तरह से खाद्य श्रृंखला में वापस नहीं आ सके, इसलिए ताजा कानून लागू किया जा रहा है।
पांच बिंदुओं में रिकॉर्ड
तेल का पांच बिंदुओं में रिकॉर्ड रखा जाएगा। बचा तेल नष्ट करने चिन्हित और तय रिसाइकल एजेंसी को ही दिया जा सकेगा। कानून ऐसे कारोबारियों पर लागू किया है, जिनके यहां रोज 50 लीटर या ज्यादा तेल इस्तेमाल किया जा रहा है।
जनवरी में चेता दिया था
इसी साल जनवरी में इंदौर में वर्ल्ड मिठाई-नमकीन कॉनक्लेव हुआ था। इसी दौरान एफएसएसएआई निदेशक माधवी दास ने उद्योगों से कहा था कि तलने के बाद बचे खाद्य तेल को रिसाइकल कर बॉयो डीजल बनाया जा रहा है। शीर्ष नमकीन उद्योग के प्रतिनिधियों से कहा गया था कि एक बार तलने में इस्तेमाल हुए तेल को दोबारा काम में न लें। रिसाइकल करने वाली एजेंसी को उसे बेच दें। खाद्य उद्योग के प्रतिनिधियों ने भी इस पर हामी भरी थी और शपथ भी ले ली थी।
नर्माता अनजान
नमकीन निर्माताओं को नियम की जानकारी नहीं है। न सर्कुलर या आदेश दिया गया। - विकास जैन, अध्यक्ष, मप्र नमकीन व मिठाई एसोसिएशन
व्यवस्था नहीं बनी
एफएसएसएआई के नियम को लागू करवाने की कोई भी कोशिश नहीं हुई। खाद्य तेल को रिसाइकल करने वाले प्लांट गुजरात में हैं। जनवरी की कॉन्फ्रेंस में तय हुआ था कि प्लांट वाले बचा तेल इकट्ठा करने के लिए इंदौर में टैंकर या वैन भेजेंगे। उन्होंने अभी तक नहीं भेजे। नियम की जानकारी है। - मनीष स्वामी, मुख्य खाद्य निरीक्षक इंदौर