
आज विघ्नहर्ता गणेश की घर-घर स्थापना के साथ गणेश उत्सव की शुरुआत हो रही है। मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख गणेश मंदिरों में सुबह से ही भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उज्जैन के चिंतामन गणेश, सीहोर के चिंतामन गणेश और इंदौर के जूना चिंतामन गणेश मंदिर भक्तों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं, आईए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में...
उज्जैन : महाराष्ट्र के अष्ट विनायक की तरह धर्मधानी उज्जैन में छह गणेश की मान्यता है। स्कंद पुराण के अवंतिखंड में इसका उल्लेख मिलता है। धर्मशास्त्र के अनुसार भगवान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण ने वनवास के दौरान उज्जैन आने पर इनकी स्थापना की थी। भगवान चिंतामन गणेश इन्हीं षड्विनायकों में से एक हैं।
पं. शंकर पुजारी ने बताया चिंतामन गणेश मंदिर में भगवान चिंतामन, इच्छामन तथा सिद्धि विनायक की संयुक्त मूर्ति विराजित है। मान्यता है भगवान श्रीराम ने चिंतामन, लक्ष्मणजी ने इच्छामन तथा माता सीता ने सिद्धि विनायक की स्थापना की थी। इस मंदिर में एक प्राचीन बावड़ी है, मान्यता है कि यहां आने पर भगवान श्रीराम व सीता जी को प्यास लगने पर लक्ष्मणजी ने बाण चलाकर धरती से जल प्रकट किया था।
इंदौर: शहर के जूनी इंदौर में स्थित जूना चिंतामन गणेश मंदिर की ख्याति भी देशभर में है। इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में परमारकालीन शासकों ने कराया था। यह मंदिर काले पत्थरों से बना है। पुरातत्व विभाग ने भी इस मंदिर को संरक्षित मंदिरों की श्रेणी में रखा है।
बताया जाता है कि यहां छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास भी आकर ठहरे थे। उन्होंने मंदिर में पवनपुत्र हनुमान की विधि विधान से स्थापना की थी। गणेश चतुर्थी पर भगवान के शृंगार दर्शन भक्तों को होंगे।
सीहोर : चिंतामन गणेश मंदिर में 10 दिवसीय गणेश महोत्सव शनिवार से शुरू हो गया है। मुख्य पुजारी पृथ्वी बल्लभ ने बताया कि 2000 साल पहले उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने गणेश के इस मंदिर की स्थापना की थी।
सिद्ध गणेश मंदिर होने के कारण शहर को सिद्धपुर कहा जाने लगा धीरे-धीरे सिद्धपुर से लोग इसे सीहोर कहने लगे हैं। देश के चार स्वयंभू प्रतिमा है, उनमें से ये एक है सीहोर का चिंतामन गणेश मंदिर है। इसके अलावा राजस्थान रणथंबोर सवाई माधोपुर, उज्जैन के चिंतामन गणेश, गुजरात के सिद्धपुर में चिंतामन गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। राजा विक्रमादित्य हर बुधवार सिद्धपुर सीहोर आते थे। विक्रम संवत 155 में यहां गर्भ ग्रह का निर्माण हो गया था।