इंदौर। शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित बड़ा गणपति मंदिर में भगवान की 25 फीट की मूर्ति को सवा मन घी और सिंदूर का चोला चढ़ाया गया। मूर्ति की सज्जा अब अंतिम चरण में है। पं. धनेश्वर दाधीच ने बताया कि मंदिर में 10 दिनी गणेशोत्सव 2 सितंबर से शुरू होगा। इसमें प्रतिदिन सुबह 11 बजे हवन-पूजन और दोपहर 12 बजे गणेशजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा व आरती होगी। इसके बाद रात 12.30 बजे तक प्रसाद वितरण किया जाएगा।

बड़ा गणपति मंदिर में श्रीगणेश की बैठी हुई मुद्रा में 25 फीट ऊंची प्रतिमा विराजित है। माना जाता है कि एशिया में यह सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा है। इस प्रतिमा को बनाने में करीब तीन वर्ष का समय लगा था और इसका निर्माण कार्य 17 जनवरी 1901 को पूरा हुआ था।

मान्यता है कि इस प्रतिमा को बनाने में तीर्थ स्थानों का जल, काशी, अयोध्या, अवंतिका और मथुरा की मिट्टी के साथ घुड़साल, हाथीखाना, गौशाला की मिट्टी और रत्नों में हीरा पन्ना, पुखराज, मोती, माणिक के साथ ईंट, बालू, चूना और मेथी के दाने के मसाले का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रतिमा को बनाने के लिए अलग-अलग धातुओं का प्रयोग भी किया गया है जैसे- मुख के लिए सोने व चांदी, कान, हाथ और सूंड के लिए तांबा और पैरों के लिए लोहे के सरियों का प्रयोग किया गया है।

वर्ष में बड़ा गणपति को 4 बार चोला चढ़ाया जाता है। एक बार चोला चढ़ाने में 15 दिन लग जाते हैं। चोले का भार एक मन होता है। इस चोले में 25 किलोग्राम सिंदूर और 15 किलोग्राम घी का मिश्रण होता है।